Telangana : सीएसआईआर-सीसीएमबी के शोधकर्ता सम्मानित

By Ajay Kumar Shukla | Updated: February 15, 2026 • 11:30 PM

हैदराबाद। जीवन विज्ञान (Life Sciences) के क्षेत्र में युवा शोधकर्ताओं के रचनात्मक और प्रभावशाली कार्य को मान्यता देने के लिए टीएनक्यू इंस्पायरिंग साइंस अवार्ड्स (TNQISA) ने इस साल भी अपनी परंपरा को जारी रखा। इस बार सीएसआईआर-सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) के दो वरिष्ठ वैज्ञानिकों डॉ. राजन संकरणारायणन और डॉ. संतोष चौहान को उनके उत्कृष्ट मार्गदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। अवॉर्ड समारोह में डॉ. जोतिन गोगोई को भी उनके शोध पेपर के लिए सम्मान मिला, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे कोशिकाएं प्रोटीन निर्माण में हुई कुछ त्रुटियों को सहन करती हैं और यह जीवित कोशिकाओं के विकास में कैसे सहायक हो सकता है।

अद्वितीय गुणधर्मों को समझने पर किया काम

डॉ. संकरणारायणन के शोध समूह ने एंज़ाइम की संरचना और उसकी अद्वितीय गुणधर्मों को समझने पर काम किया है, जो जीवन के लिए अनिवार्य हैं। उनका एक प्रमुख अध्ययन यह है कि कैसे कोशिका प्रोटीन बनाने के लिए अमीनो एसिड की सही स्थिति का चयन करती है। वहीं, डॉ. चौहान का शोध समूह कोशिका की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली, जिसे जन्मजात प्रतिरक्षा कहा जाता है, का अध्ययन करता है। उनके कार्य ने प्रोग्राम्ड सेल रिवाइवल नामक नई शोध दिशा खोली है, जो यह समझने में मदद करती है कि मरती हुई कोशिकाएं अपने आप को पुनर्जीवित करने के लिए किस प्रकार के जैव-आधारित यांत्रिकी का उपयोग करती हैं। पुरस्कार प्राप्त करने के अवसर पर दोनों वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने युवा शोधकर्ताओं की महत्वता पर जोर दिया।

मेरे लिए मेंटरशिप का मतलब केवल निर्देश देना नहीं

डॉ. चौहान ने कहा, मेरे लिए मेंटरशिप का मतलब केवल निर्देश देना नहीं है, बल्कि उन्हें सोचने, सवाल पूछने, गलतियां करने और धीरे-धीरे स्वतंत्र वैज्ञानिक बनने का अवसर देना है। जब मैं किसी को इस तरह बढ़ते हुए देखता हूँ, तो वह किसी एक परिणाम या पेपर से कहीं अधिक संतोषजनक अनुभव होता है। डॉ. संकरणारायणन ने अपने शोध समूह की दृष्टि साझा करते हुए कहा कि मेरे लैब के पुरस्कार विजेता बुनियादी जीवन विज्ञान की समस्याओं पर काम कर रहे हैं, जो फैशनेबल विषयों या तत्काल उपयोगिता वाले कार्यों से अलग हैं।

टीएनक्यू जूरी द्वारा इस मूलभूत शोध को मान्यता मिलना बेहद महत्वपूर्ण है और मुझे उम्मीद है कि यह युवा वैज्ञानिकों को बुनियादी जीवविज्ञान की समस्याओं को लेने के लिए प्रेरित करेगा। इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि केवल पुरस्कार और शोध पत्र ही नहीं, बल्कि युवा शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन और उनकी रचनात्मकता जीवन विज्ञान के क्षेत्र में एक मजबूत वैज्ञानिक इकोसिस्टम बनाने में अहम भूमिका निभाती है।

जीव विज्ञान के 4 प्रकार क्या हैं?

इस विषय की प्रमुख शाखाएँ अलग-अलग जीवों और उनकी संरचना का अध्ययन करती हैं। मुख्य चार प्रकार इस प्रकार माने जाते हैं—

  1. वनस्पति विज्ञान (Botany) – पौधों का अध्ययन
  2. प्राणी विज्ञान (Zoology) – जानवरों का अध्ययन
  3. सूक्ष्मजीव विज्ञान (Microbiology) – सूक्ष्म जीवों का अध्ययन
  4. आनुवंशिकी (Genetics) – वंशागति और गुणों का अध्ययन

जीवन विज्ञान के जनक कौन थे?

आधुनिक जीव विज्ञान की नींव रखने का श्रेय प्राचीन यूनानी दार्शनिक Aristotle को दिया जाता है। उन्होंने जीवों के वर्गीकरण और उनके व्यवहार पर विस्तृत अध्ययन किया। इसलिए उन्हें जीव विज्ञान का जनक कहा जाता है।

Zoology के पिता कौन थे?

प्राणी विज्ञान के जनक भी Aristotle को माना जाता है। उन्होंने पशुओं की संरचना, आदतों और वर्गीकरण पर व्यवस्थित रूप से अध्ययन किया था। उनके कार्यों ने आगे चलकर जीवों के वैज्ञानिक अध्ययन की मजबूत आधारशिला रखी।

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