हैदराबाद। तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) में हुई आग की घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। भद्राद्री कोत्तागुडेम में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि एफएसएल की आग को सामान्य हादसा मानकर नहीं टाला जा सकता। उन्होंने आशंका जताई कि यहां कई अहम मामलों से जुड़े हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, डीएनए रिपोर्ट और डिजिटल (DIGITAL) साक्ष्य रखे गए थे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि यह घटना फोन टैपिंग मामले की जांच को प्रभावित करने की साजिश हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार इस जांच को दो वर्षों से टाल रही है और अब तक किसी भी दोषी को नहीं पकड़ा गया है। उन्होंने बीआरएस और कांग्रेस पर आपसी मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों दल अपनी विफलताओं और भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए भाजपा पर निराधार आरोप लगा रहे हैं।
एफएसएल जांच क्या होती है?
सामान्य तौर पर एफएसएल जांच फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी द्वारा की जाने वाली वैज्ञानिक जांच होती है। इसमें अपराध से जुड़े सबूत जैसे खून, डीएनए, फिंगरप्रिंट, हथियार, दस्तावेज, मोबाइल, ऑडियो-वीडियो और केमिकल सैंपल की जांच की जाती है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि सबूत असली हैं या नहीं और अपराध से उनका क्या संबंध है।
एफएसएल टीम का फुल फॉर्म क्या है?
आधिकारिक रूप से एफएसएल का फुल फॉर्म Forensic Science Laboratory होता है। एफएसएल टीम में वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ और फॉरेंसिक अधिकारी शामिल होते हैं, जो अपराध से जुड़े साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हैं। यह टीम पुलिस और अदालतों की मदद करती है, ताकि मामलों में तथ्यात्मक और तकनीकी साक्ष्य पेश किए जा सकें।
एफएसएल प्रमाणीकरण क्या है?
प्रक्रिया के रूप में एफएसएल प्रमाणीकरण वह रिपोर्ट होती है, जिसमें लैब द्वारा जांचे गए सबूतों की सत्यता और निष्कर्ष दर्ज किए जाते हैं। यह प्रमाण अदालत में कानूनी सबूत के रूप में स्वीकार किया जाता है। एफएसएल प्रमाणन से यह स्पष्ट होता है कि साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं हुई और जांच वैज्ञानिक मानकों के अनुसार की गई है।
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