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Telangana : मक्का-ज्वार को पीएसएस में शामिल करने और खरीद सीमा हटाने की मांग

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: May 5, 2026 • 5:05 PM
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केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखकर कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने उठाई किसानों की समस्या

हैदराबाद। तेलंगाना के कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने केंद्र सरकार (Central government) से मक्का और ज्वार फसलों को मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) में शामिल करने की मांग की है। साथ ही चना और सूरजमुखी फसलों पर लागू 25 प्रतिशत खरीद सीमा को हटाने का भी अनुरोध किया है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक बार फिर पत्र लिखकर आग्रह किया। मंत्री ने कहा कि राज्य में रबी (Yasangi) सीजन में पैदा हुई चना और सूरजमुखी फसलों पर केंद्र द्वारा तय 25 प्रतिशत खरीद सीमा के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। शेष फसल राज्य सरकार को खरीदनी पड़ रही है, जिससे राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

सूरजमुखी की 3,690 मीट्रिक टन खरीद की दी थी अनुमति

उन्होंने बताया कि केंद्र ने चना की 29,860 मीट्रिक टन और सूरजमुखी की 3,690 मीट्रिक टन खरीद की अनुमति दी थी, जो पिछले सप्ताह ही पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद किसानों के पास अभी भी बड़ी मात्रा में फसल बची हुई है और वे बाजारों में ला रहे हैं। मंत्री ने केंद्र से चना खरीद सीमा बढ़ाकर 1,12,077 मीट्रिक टन और सूरजमुखी की खरीद 10,839 मीट्रिक टन तक करने की अनुमति देने की मांग की है। तुम्मला नागेश्वर राव ने कहा कि तेलंगाना में मक्का और ज्वार की बड़े पैमाने पर खेती होती है। इस रबी सीजन में 11.21 लाख एकड़ में मक्का की खेती हुई है और औसत उपज 26.57 क्विंटल प्रति एकड़ रही है। वहीं ज्वार की खेती 3.68 लाख एकड़ में हुई है और इसकी उपज लगभग 10 क्विंटल प्रति एकड़ रहने का अनुमान है।

3.99 लाख मीट्रिक टन मक्का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी

उन्होंने बताया कि बाजार में उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण राज्य सरकार ने 246 खरीद केंद्र स्थापित कर इस रबी सीजन में लगभग 3.99 लाख मीट्रिक टन मक्का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी है। वहीं पिछले खरीफ सीजन में भी 3.76 लाख मीट्रिक टन मक्का खरीद पर करीब 902.80 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। मंत्री ने केंद्र सरकार से मांग की है कि मक्का और ज्वार को पीएसएस योजना में शामिल कर केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से क्रमशः 14.89 लाख मीट्रिक टन मक्का और 2.76 लाख मीट्रिक टन ज्वार की खरीद की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को एमएसपी का लाभ मिलेगा और उन्हें कम कीमत पर फसल बेचने की मजबूरी से राहत मिलेगी।

ज्वार का देसी नाम क्या है?

अनाज को कई क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानीय नामों से जाना जाता है। आम बोलचाल में इसे “जोंधरा”, “जुआर” या “ज्वारी” भी कहा जाता है। अंग्रेज़ी में इसका नाम Sorghum होता है। यह एक मोटा अनाज है, जो खासकर ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से उपयोग में लाया जाता रहा है और पारंपरिक भोजन का हिस्सा माना जाता है।

ज्वार और मक्का में क्या फर्क है?

दोनों अनाज अलग-अलग पौधों से प्राप्त होते हैं। ज्वार के दाने छोटे और गोल होते हैं, जबकि मक्का के दाने बड़े और पीले रंग के होते हैं। ज्वार सूखा सहन करने वाली फसल है, जबकि मक्का को अधिक पानी की जरूरत होती है। पोषण की दृष्टि से ज्वार में फाइबर अधिक होता है, जबकि मक्का में कार्बोहाइड्रेट ज्यादा पाया जाता है।

ज्वार और मक्की में क्या अंतर है?

इन दोनों अनाजों में खेती, स्वाद और उपयोग के आधार पर अंतर देखा जाता है। ज्वार की रोटी हल्की और आसानी से पचने वाली मानी जाती है, जबकि मक्की की रोटी थोड़ी भारी होती है। ज्वार अधिक सूखे क्षेत्रों में उगाई जाती है, जबकि मक्की सामान्य मौसम में भी अच्छी तरह उगती है। दोनों ही पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन उनके उपयोग और स्वाद में भिन्नता होती है।

ज्वार की रोटी किसे नहीं खानी चाहिए?

कुछ लोगों को इसे सीमित मात्रा में या डॉक्टर की सलाह से ही खाना चाहिए। जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्या, गैस या एलर्जी की शिकायत हो, उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए। छोटे बच्चों या बहुत कमजोर पाचन वाले लोगों को भी इसे धीरे-धीरे आहार में शामिल करना चाहिए। किसी विशेष बीमारी या आहार संबंधी प्रतिबंध होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

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