हैदराबाद। सड़क एवं भवन मंत्री कोमटिरेड्डी वेंकट रेड्डी (Komati Reddy Venkat Reddy) ने शनिवार को कहा कि नलगोंडा को सुपर स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा और इसके लिए हैदराबाद के समकक्ष बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जाएगा। नलगोंडा नगर निगम (Nalgonda Municipal Corporation) में 18.70 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के शिलान्यास के बाद आयोजित कार्यक्रम में मंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में शहर के विकास पर लगभग 2,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं और आवश्यकता पड़ने पर सरकार और 2,000 करोड़ रुपये जुटाने को भी तैयार है।
शहरी परियोजनाओं का तेज़ होगा क्रियान्वयन
उन्होंने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नलगोंडा को नगर निगम का दर्जा मिलने से केंद्र सरकार से सीधे फंड प्राप्त होंगे और शहरी परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेज़ होगा। मंत्री ने बताया कि अमृत-2 योजना के तहत 216 करोड़ की लागत से भूमिगत जलनिकासी और एसटीपी का निर्माण किया जा रहा है। 56.75 करोड़ से पेयजल आपूर्ति मज़बूत की जा रही है, जिसमें 12 नए पानी टैंकों का निर्माण शामिल है। आंतरिक सड़कों और नालियों पर 53 करोड़ तथा बाढ़ नहरों, श्मशान घाटों और सड़कों पर 109 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं।
प्रगति पर सड़क परियोजना
उन्होंने बताया कि 545 करोड़ की बायपास सड़क, पनागल्लू चाय सोमेश्वर मंदिर से एसएलबीसी कॉलोनी तक सड़क व नाली कार्य, तथा एसएलबीसी मेडिकल कॉलेज–अडंकी सड़क परियोजना प्रगति पर है। शहर के लिए स्वीकृत पाँच बिजली उपकेंद्रों में से चार पर कार्य शुरू हो चुका है। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोज़गार के क्षेत्र में नर्सिंग कॉलेज, क्रिटिकल केयर सेंटर, यंग इंडिया आवासीय विद्यालय, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय का विस्तार, फूड स्ट्रीट्स, पार्क और डिजिटल कक्षाएँ विकसित की जा रही हैं। मंत्री ने जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य नलगोंडा को एक आदर्श स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करना है। इस अवसर पर जिला कलेक्टर बी. चंद्रशेखर, अतिरिक्त कलेक्टर जे. श्रीनिवास, वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
स्मार्ट सिटी क्या है?
आधुनिक तकनीक और डिजिटल साधनों की मदद से विकसित किया गया ऐसा शहर इसमें आता है, जहां परिवहन, बिजली, पानी, कचरा प्रबंधन, सुरक्षा और नागरिक सेवाएं स्मार्ट तरीके से संचालित की जाती हैं। इसका उद्देश्य जीवन स्तर सुधारना, संसाधनों का सही उपयोग और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना होता है।
स्मार्ट सिटी का उदाहरण क्या है?
भारत में सूरत, पुणे, इंदौर और भुवनेश्वर जैसे शहरों को अच्छे उदाहरण के रूप में देखा जाता है। इन शहरों में स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन सेवाएं, स्वच्छता प्रबंधन और तकनीक आधारित शहरी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।
भारत की पहली स्मार्ट सिटी कौन सी है?
भुवनेश्वर को देश की पहली स्मार्ट सिटी माना जाता है। इसे स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत शुरुआती चरण में चुना गया था, जहां योजनाबद्ध विकास, डिजिटल सेवाओं और नागरिक सहभागिता के माध्यम से शहरी जीवन को बेहतर बनाने पर काम किया गया।
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