मंत्री ने विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की
हैदराबाद। राजस्व, आवास तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी (Ponguleti Srinivas Reddy) ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने और जान-माल के नुकसान को न्यूनतम स्तर तक सीमित करने के उद्देश्य से तेलंगाना राज्य आपदा प्रबंधन विभाग (Telangana State Disaster Management Department) को सशक्त बनाकर उसे देश के लिए एक रोल मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसी भी आपदा का सामना करने के लिए 100 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक उपकरण खरीदे जाने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में बुधवार को सचिवालय स्थित अपने कार्यालय में आपदा प्रबंधन, अग्निशमन सेवाएं, एसडीआरएफ, हाइड्रा और आईसीसीसी विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक उपकरणों पर विस्तृत चर्चा की गई।
की जा रही रियल टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित
मंत्री ने कहा कि बाढ़, अग्निकांड जैसी आपात परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए सटीक सूचना तंत्र और रियल टाइम मॉनिटरिंग व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके तहत आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली, ड्रोन, सैटेलाइट आधारित संचार व्यवस्था, आधुनिक रेस्क्यू उपकरण तथा अत्याधुनिक फायर और सर्च ऑपरेशन तकनीक को राजस्व–आपदा प्रबंधन विभागों को उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि आपदा प्रबंधन विभाग में कार्यरत कर्मियों के लिए राज्य स्तर पर एक अत्याधुनिक प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही मौसम की स्थिति की जानकारी जनता तक तुरंत पहुंचाने के लिए मंडल स्तर तक एडवांस्ड वेदर स्टेशनों की स्थापना की जाएगी। भारी बारिश और बाढ़ के दौरान नालों, झरनों और तालाबों में फंसे लोगों को बचाने के लिए एयरलिफ्ट मैकेनिज्म विकसित करने तथा 70 से 80 किलोग्राम वजन उठाने में सक्षम ड्रोन खरीदने के निर्देश दिए गए हैं।
एयरलिफ्ट सुविधा के अभाव में पीड़ितों को बचा न पाने पर जताया खेद
इस अवसर पर मंत्री ने 2024 में अपने पालेयरु निर्वाचन क्षेत्र में एयरलिफ्ट सुविधा के अभाव में पीड़ितों को बचा न पाने पर खेद भी व्यक्त किया। उन्होंने हैदराबाद स्थित इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर से राज्य के दूरदराज इलाकों तक संपर्क के लिए सिम आधारित वीएचएफ रेडियो सिस्टम को फील्ड स्तर तक विस्तार देने के निर्देश दिए। इसके अलावा हैदराबाद शहर में ऊंची इमारतों में आग लगने की घटनाओं से निपटने के लिए आवश्यक उपकरण खरीदने और 77 हाई-स्पीड बोट्स की व्यवस्था करने को कहा। मंत्री ने बताया कि राज्य में 12 एसडीआरएफ टीमें कार्यरत हैं, जिनमें प्रत्येक में लगभग एक हजार सदस्य हैं, जिन्हें निरंतर प्रशिक्षण दिया जाएगा। बैठक में राज्य आपदा प्रबंधन के विशेष मुख्य सचिव अरविंद कुमार, अग्निशमन सेवा निदेशक विक्रमन सिंह, हाइड्रा आयुक्त रंगनाथ, आईसीसीसी निदेशक कमल हासन रेड्डी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मेडाराम जातरा व्यवस्थाओं की मंत्री पोंगुलेटी ने की समीक्षा
मेडाराम महाजातरा में लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी समन्वय के साथ कार्य करें। यह निर्देश राज्य के राजस्व, आवास तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने दिए। कोटि श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र और तेलंगाना के कुंभमेला के रूप में प्रसिद्ध सम्मक्का–सारलम्मा मेडाराम जातरा के पवित्र प्रथम चरण के बुधवार को आरंभ होने के अवसर पर मंत्री ने सचिवालय से हाई-फ्रीक्वेंसी वॉकी-टॉकी के माध्यम से मेदाराम में तैनात ट्रैफिक ड्यूटी कर्मियों से बातचीत कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

उपलब्ध सुविधाओं की ली जानकारी
उन्होंने पहले दिन श्रद्धालुओं की संख्या, सारलम्मा वार्ल आगमन, यातायात व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। मंत्री ने निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पुलिस व्यवस्था को मजबूत रखा जाए, यातायात बाधित न हो तथा पेयजल और परिवहन सुविधाओं की नियमित निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा प्रतिष्ठित रूप से आयोजित इस महाजातरा में सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य कर यह सुनिश्चित करें कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
डिजास्टर मैनेजमेंट क्या होता है?
आपदाओं की स्थिति में जीवन, संपत्ति और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए की जाने वाली योजना, तैयारी और कार्रवाई को कहते हैं। इसमें जोखिम मूल्यांकन, बचाव, राहत, पुनर्वास और आपदा से पहले और बाद के प्रबंधन के उपाय शामिल होते हैं।
डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट कब लागू हुआ था?
भारत में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 लागू किया गया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर आपदा प्रबंधन की संरचना और प्रक्रियाएं स्थापित करना है। अधिनियम से आपदा रोकथाम, बचाव और पुनर्वास के लिए कानूनी आधार मिला।
आपदा के 4 प्रकार कौन से हैं?
- प्राकृतिक आपदा – बाढ़, भूकंप, तूफान।
- मानव निर्मित आपदा – औद्योगिक दुर्घटना, आग।
- सामाजिक आपदा – हिंसा, दंगे, पलायन।
- जैविक/स्वास्थ्य आपदा – महामारी, संक्रमण।
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