सफलता के पीछे प्रभावी क्रियान्वयन की अहम भूमिका
हैदराबाद। दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ‘कवच 4.0’ प्रणाली के तहत 487 रूट किलोमीटर में फील्ड ट्रायल सफलतापूर्वक पूर्ण कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह उपलब्धि रेलवे बोर्ड द्वारा निर्धारित 402 रूट किमी के लक्ष्य से कहीं अधिक है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस सफलता के पीछे सूक्ष्म योजना और प्रभावी क्रियान्वयन की अहम भूमिका रही है। एससीआर ने न केवल कवच प्रणाली के विस्तार में उल्लेखनीय प्रगति की है, बल्कि ट्रेन संचालन को अधिक सुरक्षित (Safe) और कुशल बनाने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए हैं।
ट्रेन सुरक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता हुई सुनिश्चित
‘कवच 4.0’ के फील्ड ट्रायल काजीपेट–पेड्दमपेट (101 किमी), मल्काजगिरी–कामारेड्डी (106 किमी), चेर्रापल्ली–रघुनाथपल्ली (79 किमी), गुंतकल–रायचूर (120 किमी) और मुदखेड़–परभणी (81 किमी) सेक्शनों में किए गए। इन मार्गों पर लोको कवच ट्रायल भी सफलतापूर्वक संचालित किए गए, जिससे ट्रेन सुरक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता सुनिश्चित हुई। एससीआर ने इसी वित्तीय वर्ष में 357 रूट किमी के लक्ष्य के मुकाबले 479 रूट किमी में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (एबीएस) प्रणाली को भी सफलतापूर्वक लागू किया। यह प्रणाली काजीपेट–बल्हारशाह, विजयवाड़ा–दुव्वाडा और वाडी–रेनिगुंटा सेक्शनों में स्थापित की गई है।
ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग एक आधुनिक प्रणाली
ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग एक आधुनिक प्रणाली है, जिसमें ट्रेनों की आवाजाही स्वचालित सिग्नलों के माध्यम से नियंत्रित होती है। यह प्रणाली ट्रेनों को एक ही दिशा में सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए चलने की अनुमति देती है, जिससे पीछे से टक्कर (रियर-एंड कोलिजन) की संभावना समाप्त हो जाती है। इसके साथ ही यह प्रणाली रेल मार्ग की क्षमता बढ़ाने, लागत कम करने और ट्रेनों की औसत गति में सुधार करने में भी सहायक सिद्ध होती है। एससीआर के महाप्रबंधक संजय कुमार श्रीवास्तव ने इस उपलब्धि पर सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि जोनल और डिवीजन स्तर पर टीम के समन्वित प्रयासों से यह रिकॉर्ड संभव हो पाया है। महाप्रबंधक ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में भी ‘कवच’ और ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग को शीर्ष प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि रेलवे नेटवर्क को और अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाया जा सके।
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