Hyderabad : एसीएसओ कार्यालय हटाने के फैसले पर पूर्व मंत्री ने जताई आपत्ति

By Ajay Kumar Shukla | Updated: February 25, 2026 • 12:52 PM

हैदराबाद। पूर्व मंत्री व बीआरएसएलपी के डिप्टी फ्लोर लीडर टी. हरीश राव (T. Harish Rao) ने हैदराबाद के पुराने शहर से सहायक नागरिक आपूर्ति अधिकारियों (एसीएसओ) के कार्यालयों को स्थानांतरित किए जाने के प्रस्ताव पर चिंता जताई है। यह मामला बीआरएस के चारमीनार विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी मो. सलाउद्दीन लोधी ने पूर्व मंत्री के संज्ञान में लाकर कार्यालय का स्थानांतरण (transfer) रोके जाने की मांग की थी। पूर्व मंत्री ने इस संबंध में सिंचाई, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी को एक पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। पत्र में हरीश राव ने बताया कि सर्कल 1, 2 और 3 के एसीएसओ कार्यालयों को पुराने शहर से नामपल्ली स्थित चंद्र विहार भवन में स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है।

आवश्यक वस्तुओं और दस्तावेजी कार्यों के लिए इन कार्यालयों पर निर्भर

उन्होंने कहा कि इस निर्णय से हजारों राशन कार्डधारकों, विशेषकर बुजुर्गों, दिहाड़ी मजदूरों और निम्न आय वर्ग के परिवारों को गंभीर असुविधा होगी, जो आवश्यक वस्तुओं और दस्तावेजी कार्यों के लिए इन कार्यालयों पर निर्भर हैं। विधायक ने सुझाव दिया कि इन कार्यालयों को पुराने शहर क्षेत्र में ही जारी रखा जाए ताकि आम नागरिकों की पहुंच आसान बनी रहे। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में दारुलशफा क्षेत्र में कुली कुतुब शाह शहरी विकास प्राधिकरण परिसर में उपलब्ध खाली स्थान का उपयोग कर कार्यालय संचालित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। हरीश राव ने मंत्री से आग्रह किया कि जनहित को ध्यान में रखते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देकर इन कार्यालयों को पुराने शहर की सीमा में ही बनाए रखने अथवा समीपवर्ती क्षेत्र में स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जाए, ताकि गरीबों को अनावश्यक परेशानियों से बचाया जा सके।

संसद का फ्लोर लीडर कौन है?

संसद में फ्लोर लीडर वह वरिष्ठ सदस्य होता है जो सदन में अपने दल का नेतृत्व करता है। लोकसभा में सत्तारूढ़ दल का फ्लोर लीडर आमतौर पर प्रधानमंत्री होता है, जबकि राज्यसभा में यह भूमिका संबंधित दल का नामित नेता निभाता है। वर्तमान में लोकसभा में सत्तारूढ़ पक्ष के फ्लोर लीडर Narendra Modi हैं।

मंजिल नेता की भूमिका क्या है?

संसदीय व्यवस्था में “मंजिल नेता” शब्द प्रचलित नहीं है; संभवतः आशय “सदन के नेता” (Leader of the House) से है। सदन का नेता सरकार के विधायी कार्यों की योजना बनाता है, एजेंडा तय करता है और बहस के संचालन में समन्वय करता है। वह सरकार और अन्य दलों के बीच संवाद का प्रमुख माध्यम होता है।

उप नेता की क्या भूमिका होती है?

उप नेता (Deputy Leader) अपने दल के नेता की अनुपस्थिति में जिम्मेदारी संभालता है। वह सदन में पार्टी की रणनीति, बहस में भागीदारी और सदस्यों के समन्वय में सहायता करता है। जरूरत पड़ने पर वह पार्टी की ओर से आधिकारिक बयान भी देता है और विधायी कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाता है।

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