केटीआर ने कीमतें वापस लेने की मांग की
हैदराबाद। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव (KTR) ने रसोई गैस की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मजदूर दिवस के दिन गैस महंगी करना गरीब और मेहनतकश लोगों पर बोझ डालने जैसा है। तेलंगाना भवन में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने एक ही बार में गैस सिलेंडर के दाम में लगभग एक हजार रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है, जो अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद में व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमत 3315 रुपये तक पहुंच गई है, जिससे होटल, छोटे व्यापारी और स्वरोजगार करने वाले लोगों को भारी नुकसान होगा।
महंगी हो सकती हैं खाने-पीने की चीजें
उन्होंने चेतावनी दी कि गैस के दाम बढ़ने से खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो सकती हैं। इससे होटल और छोटे व्यवसाय बंद होने की स्थिति में आ सकते हैं और लाखों लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता है। रामाराव ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल पर ज्यादा कर लगाकर उनकी कीमतें बढ़ा रही है, जिससे महंगाई बढ़ रही है और रुपये की कीमत कमजोर हो रही है। अंत में उन्होंने लोगों से ईंधन की बढ़ी कीमतों के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की और केंद्र सरकार से गैस, पेट्रोल और डीजल की बढ़ी हुई कीमतों को तुरंत वापस लेने की मांग की।
1 मई को मजदूर दिवस क्यों मनाया जाता है?
यह दिन श्रमिकों के अधिकारों, सम्मान और उनके योगदान को मान्यता देने के लिए मनाया जाता है। 1 मई 1886 को अमेरिका के शिकागो में मजदूरों ने 8 घंटे काम की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन किया था। इस संघर्ष में कई मजदूरों ने बलिदान दिया। उनकी याद में हर वर्ष 1 मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है, ताकि श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक न्याय के महत्व को याद रखा जा सके।
मजदूर दिवस के जनक कौन हैं?
आंदोलन को संगठित रूप देने में कई नेताओं का योगदान रहा, लेकिन पीटर मैकग्वायर को अक्सर मजदूर दिवस का जनक माना जाता है। वे अमेरिका के एक प्रमुख श्रमिक नेता और बढ़ई थे। उन्होंने श्रमिकों के लिए बेहतर वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और उचित काम के घंटे की मांग उठाई। उनके प्रयासों से श्रमिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ी और मजदूर दिवस की परंपरा मजबूत हुई।
मजदूर दिवस का इतिहास क्या है?
इसकी शुरुआत 19वीं सदी में औद्योगिक क्रांति के दौरान हुई, जब मजदूरों से लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में काम कराया जाता था। 1886 में शिकागो के हेमार्केट आंदोलन ने श्रमिक अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी। 1889 में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में 1 मई को श्रमिक दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद कई देशों में यह दिन मजदूरों के सम्मान में मनाया जाने लगा।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :