नई दिल्ली/ हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी (Chief Minister Revanth Reddy) ने मोइनाबाद ड्रग्स मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस प्रकरण में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्टेशन बेल नियमों के तहत दी गई थी और इसमें किसी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं हुआ। दिल्ली दौरे के दौरान मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने बताया कि मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है।
तेलंगाना में अगला विधानसभा चुनाव 2029 में ही
उन्होंने यह भी कहा कि तेलंगाना में अगला विधानसभा चुनाव 2029 में ही होगा, 2028 में नहीं। साथ ही उन्होंने महिलाओं के आरक्षण को जल्द लागू किए जाने का समर्थन किया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने संसद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। इस दौरान तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ भी मौजूद थे। उन्होंने हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित वेम नरेंद्र रेड्डी का परिचय भी कराया।
तेलंगाना का पुराना नाम क्या था?
ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र लंबे समय तक हैदराबाद राज्य का हिस्सा माना जाता था। स्वतंत्रता से पहले यह इलाका निज़ाम के शासन के अधीन था और बाद में 1956 में भाषाई आधार पर पुनर्गठन के दौरान इसे आंध्र प्रदेश में शामिल कर दिया गया। वर्ष 2014 में अलग राज्य बनने से पहले इस क्षेत्र को तेलंगाना क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। इस तरह हैदराबाद राज्य और बाद में आंध्र प्रदेश का हिस्सा इसका प्रमुख ऐतिहासिक नाम और प्रशासनिक पहचान रही है।
तेलंगाना का मुख्य धर्म कौन सा है?
राज्य में विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं, लेकिन जनसंख्या के आधार पर हिंदू धर्म सबसे अधिक माना जाता है। इसके अलावा इस क्षेत्र में इस्लाम और ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों की भी अच्छी संख्या है। धार्मिक विविधता तेलंगाना की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां कई प्रसिद्ध मंदिर, मस्जिद और चर्च मौजूद हैं, जो अलग-अलग समुदायों की आस्था और परंपराओं को दर्शाते हैं।
तेलंगाना का राष्ट्रीय वृक्ष कौन सा है?
राज्य का आधिकारिक वृक्ष Prosopis cineraria माना जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में जामी या शमी भी कहा जाता है। यह पेड़ शुष्क और गर्म क्षेत्रों में आसानी से उग जाता है और पर्यावरण के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है। इसकी छाया, लकड़ी और पत्तियां ग्रामीण जीवन में कई तरह से काम आती हैं। पारंपरिक मान्यताओं में भी इस वृक्ष का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बताया जाता है।
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