हैदराबाद। वेक्टर जनित रोगों के नियंत्रण में हैदराबाद द्वारा किए गए प्रयासों को भारत सरकार से सराहना मिली है। यह प्रशंसा नागपुर में आयोजित महानगरीय सर्विलांस इकाइयों (MSU) की राष्ट्रीय समीक्षा बैठक के दौरान की गई। बैठक में ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (GHMC) के आयुक्त आर. वी. कर्णन ने वर्ष 2025 में डेंगू मामलों में उल्लेखनीय कमी लाने के लिए अपनाई गई रणनीतियों की प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि वेक्टर बॉर्न डिज़ीज़ (वीबीडी ) ऐप के माध्यम से निगरानी व्यवस्था को सशक्त बनाया गया, जिसमें जीआईएस आधारित डैशबोर्ड और रीयल-टाइम डेटा अपडेट्स की सुविधा है, जिससे समय पर फील्ड स्तर पर कार्रवाई संभव हुई। भारत सरकार ने हैदराबाद के तकनीक-आधारित, डेटा-प्रेरित दृष्टिकोण और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय की सराहना की। केंद्र ने इसे शहरी क्षेत्रों में वेक्टर जनित रोगों के प्रभावी प्रबंधन के लिए एक उत्कृष्ट मॉडल बताया।
वेक्टर जनित रोग कौन से होते हैं?
ऐसे रोग जो मच्छर, मक्खी, जूं, पिस्सू या किलनी जैसे कीटों के माध्यम से मनुष्यों में फैलते हैं, वेक्टर जनित रोग कहलाते हैं। इनमें मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जीका, फाइलेरिया, जापानी इंसेफेलाइटिस, कालाजार और प्लेग जैसे रोग शामिल हैं। ये रोग तब फैलते हैं जब संक्रमित कीट किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है। साफ-सफाई की कमी, रुका हुआ पानी और गर्म जलवायु इन रोगों के फैलाव को बढ़ाती है, इसलिए रोकथाम के लिए मच्छर नियंत्रण और स्वच्छ वातावरण जरूरी होता है।
वेक्टर जनित रोग कौन सा है?
मलेरिया एक प्रमुख वेक्टर जनित रोग माना जाता है। यह रोग मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है, जो प्लाज्मोडियम परजीवी को मानव शरीर में पहुंचाता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, कमजोरी और पसीना आना शामिल है। समय पर इलाज न होने पर यह रोग गंभीर रूप भी ले सकता है। मच्छरों से बचाव, साफ पानी का प्रबंधन और नियमित दवा उपचार इस रोग की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वाहक जनित रोग क्या है?
वाहक जनित रोग वे बीमारियां होती हैं जो किसी जीवित वाहक के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचती हैं। यहां वाहक से तात्पर्य मच्छर, मक्खी, जूं या अन्य कीटों से होता है, जो रोगाणुओं को अपने शरीर में लेकर फैलाते हैं। ये रोग सीधे संपर्क से नहीं, बल्कि वाहक के काटने या संपर्क से होते हैं। ऐसे रोगों की रोकथाम के लिए कीट नियंत्रण, स्वच्छता, पानी जमा न होने देना और जनजागरूकता बेहद आवश्यक मानी जाती है।
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