पुलिस ने इस मामले में अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की
हैदराबाद। माओवादी शीर्ष नेता बरसे देवा (Barse Deva) और उनके समूह के 15 अन्य सदस्य कथित रूप से तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक के सामने आत्मसमर्पण कर चुके हैं। हालांकि, राज्य पुलिस ने इस मामले में अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की है। सूत्रों के अनुसार, वह फिलहाल तेलंगाना पुलिस की हिरासत में हैं। तेलंगाना पुलिस की ओर से एक आधिकारिक घोषणा अगले एक-दो दिनों में आने की संभावना है। बरसे देवा माओवादी पार्टी की गुरिल्ला लिबरेशन आर्मी (PLGA) के प्रमुख के रूप में कार्यरत थे।
पार्टी की सशस्त्र सेनाओं के प्रभारी थे हिड़मा
एनकाउंटर के बाद वे माओवादी पार्टी में एक प्रमुख नेता बन गए और पार्टी की सशस्त्र सेनाओं के प्रभारी थे। हिड़मा और बरसे देवा छत्तीसगढ़ के एक ही गांव से संबंधित हैं। देवा ने माओवादी को हथियारों की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चार राज्यों छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में से कहाँ आत्मसमर्पण किया जाए, इस पर लंबी विचार-विमर्श के बाद उन्हें कोत्तागुडेम जिला पुलिस के संरक्षण में लाकर आत्मसमर्पण कराया गया।
हिड़मा के एनकाउंटर से पहले ही ले लिया था आत्मसमर्पण का निर्णय
छत्तीसगढ़ पुलिस के सूत्रों ने बताया कि बरसे देवा ने हिड़मा के एनकाउंटर से पहले ही आत्मसमर्पण का निर्णय ले लिया था। हिड़मा के एनकाउंटर के बाद यह प्रक्रिया तेज हुई। उनके ऊपर 50 लाख रुपये का इनाम भी घोषित था। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, बरसे देवा ने चारों राज्यों की पुलिस से मध्यस्थों के जरिए संपर्क किया और अंततः तेलंगाना में आत्मसमर्पण किया। बरसे देवा, सुकमा जिले के पुवर्ती गांव के निवासी, हिड़मा के साथ लगभग डेढ़ दशक तक काम कर चुके थे।
राज्य सैन्य आयोग की जिम्मेदारियां भी संभाली
हिड़मा के केंद्रीय समिति में पदोन्नति के बाद पार्टी ने उनके जिम्मेदारियों को बरसे देवा को सौंपा। बाद में उन्होंने राज्य सैन्य आयोग की जिम्मेदारियां भी संभाली। छत्तीसगढ़ पुलिस ने दावा कि बरसे देवा ने कई प्रमुख मुठभेड़ों में हिस्सा लिया, जिनमें सीआरपीएफ जवानों की मौत हुई। केंद्रीय सरकार के ऑपरेशन कगर, लगातार मुठभेड़, नेतृत्व हानि, आत्मसमर्पण और हथियार समर्पण जैसी कार्रवाइयों के बाद क्षेत्रीय स्तर की कमेटियां और स्क्वाड्स असमंजस में पड़ गए।
तुरंत न्यायालय में पेश करे सरकार
एनकाउंटर के बाद स्क्वाड कमांडर, क्षेत्रीय समिति सदस्य और मिलिशिया भ्रमित हो गए और उन्होंने आत्मसमर्पण को सर्वोत्तम विकल्प समझा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, तेलंगाना सिविल लिबर्टीज कमेटी के अध्यक्ष और महासचिव ने प्रेस विज्ञप्ति में मांग की कि सरकार बरसे देवा और उनके साथ हिरासत में 15 अन्य लोगों को तुरंत न्यायालय में पेश करे। उन्होंने याद दिलाया कि पुलिस ने उन्हें केवल दो दिन पहले तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा के पास हिरासत में लिया था।
माओबाड़ी के किशनजी नेता कौन थे?
किशनजी का असली नाम कोटेश्वर राव था। वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के एक वरिष्ठ नेता माने जाते थे। पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के कुछ इलाकों में उनकी सक्रियता रही। वर्ष 2011 में पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में उनकी मौत हो गई।
माओवादी किसे कहते हैं?
उन लोगों या संगठनों को कहा जाता है जो चीन के नेता माओ त्से तुंग के विचारों से प्रेरित होकर सशस्त्र संघर्ष के जरिए व्यवस्था बदलने में विश्वास रखते हैं। भारत में इन्हें नक्सली भी कहा जाता है और ये मुख्य रूप से आदिवासी व ग्रामीण इलाकों में सक्रिय रहे हैं।
माओवादी नेता क्या होता है?
ऐसा व्यक्ति जो माओवादी संगठन में नेतृत्व की भूमिका निभाता है, इसी नाम से जाना जाता है। वह संगठन की रणनीति, गतिविधियों और कैडर को दिशा देने का काम करता है। भारत में माओवादी गतिविधियों को गैरकानूनी माना गया है।
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