Mauritius : अतिथियों के सम्मान में भारतीयों का कोई सानी नहीं – गोखूल

By Ajay Kumar Shukla | Updated: January 8, 2026 • 4:26 PM

मॉरीशस के राष्ट्रपति ने श्री वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम का दौरा किया

तिरुमला। मॉरीशस के राष्ट्रपति धर्मबीर गोखूल (Dharmbir Gokul) ने कहा कि मॉरीशस, आंध्र प्रदेश से प्रेरणा लेकर संस्कृति, परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय से देश के विकास के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। बुधवार को राष्ट्रपति ने तिरुमला स्थित धर्मगिरि के श्री वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम का दौरा किया। उनका स्वागत टीटीडी के अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी सीएच वेंकैया चौधरी और वेद विज्ञान पीठम के प्रधानाचार्य कुप्पा शिव सुब्रह्मण्य अवधानी ने किया। इसके पश्चात वेद विद्यालय परिसर स्थित आनंद निलयम में श्री वेंकटेश्वर स्वामी (Sri Venkateswara Swamy) एवं श्री गोदादेवी अम्मावारु के लिए विशेष पूजा-अर्चना की गई। आयोजित विशेष बैठक में वेद विज्ञान पीठम के प्रधानाचार्य ने राष्ट्रपति का स्वागत भाषण दिया। इसके बाद आचार्यों एवं छात्रों ने सामूहिक वेद पारायण किया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य ने धर्मगिरि वेद विज्ञान पीठम के इतिहास की जानकारी दी।

समाज में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे शिक्षक के रूप में कार्य करते हुए राष्ट्रपति पद तक पहुंचे हैं और समाज में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने याद किया कि विश्व तेलुगु सम्मेलन के दौरान उन्हें परिवार सहित श्री वेंकटेश्वर स्वामी के दर्शन का अवसर मिला था। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश संस्कृति, परंपरा और आधुनिक तकनीक के मजबूत आधार पर प्रगति कर रहा है और मॉरीशस भी इसी मार्ग पर चल रहा है। उन्होंने कहा कि अतिथियों के सम्मान में भारतीयों का कोई सानी नहीं है। राष्ट्रपति ने घोषणा की कि मॉरीशस में निर्माणाधीन हरिहर मंदिर परिसर में टीटीडी के मार्गदर्शन से एक वेद विद्यालय स्थापित किया जाएगा। अंत में वेद विद्वानों ने राष्ट्रपति को वेदिक आशीर्वाद दिया और उन्हें श्री वेंकटेश्वर स्वामी का चित्र भेंट किया गया।

वेद विज्ञान के कितने क्षेत्र हैं?

प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में वेद विज्ञान को कई प्रमुख क्षेत्रों में बाँटा गया है। सामान्य रूप से इसमें खगोल विज्ञान, गणित, आयुर्वेद, वास्तु शास्त्र, कृषि विज्ञान, पर्यावरण ज्ञान, धातु विज्ञान, ध्वनि विज्ञान और आध्यात्मिक दर्शन जैसे लगभग 8 से 10 क्षेत्र माने जाते हैं। ये सभी क्षेत्र वेदों में वर्णित प्राकृतिक नियमों और जीवन पद्धतियों से जुड़े हुए हैं।

भारतीय संस्कृति को वेदों के दिन क्या हैं?

भारतीय संस्कृति की आधारशिला वेदों को माना जाता है। वेदों के अनुसार सत्य, धर्म, कर्म, यज्ञ, प्रकृति सम्मान और मानव कल्याण जीवन के मूल सिद्धांत हैं। इन्हीं शिक्षाओं के कारण भारतीय संस्कृति को सनातन कहा गया है, जो समय के साथ विकसित होती रही। वेदों ने सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को दिशा दी।

वेद विज्ञान क्या है?

प्राकृतिक नियमों, ब्रह्मांड, जीवन और चेतना के वैज्ञानिक अध्ययन को वेद विज्ञान कहा जाता है। इसमें मंत्रों, यज्ञों, गणनाओं और दर्शन के माध्यम से प्रकृति के रहस्यों को समझाने का प्रयास किया गया है। आधुनिक विज्ञान के कई सिद्धांतों की झलक वेद विज्ञान में मिलती है, इसलिए इसे ज्ञान का प्राचीन वैज्ञानिक स्वरूप माना जाता है।

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