DCM : हर बेघर परिवार को सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए इंदिरम्मा योजना- भट्टी

By Ajay Kumar Shukla | Updated: January 11, 2026 • 11:12 PM

डिप्टी सीएम ने रामगुंडम में जनसभा को संबोधित किया

हैदराबाद। उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क (Bhatti Vikramarka) ने कहा कि राज्य सरकार ने इंदिरम्मा आवास योजना इस उद्देश्य से शुरू की है ताकि बेघर और जरूरतमंद गरीबों को सम्मानजनक आवास मिल सके। उन्होंने कहा, ”यह भी उत्साहजनक है कि उन गरीबों को भी मकान स्थल उपलब्ध कराने के लिए कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं जिनके पास घर बनाने के लिए अपनी जमीन तक नहीं है।” रविवार को रामगुंडम (Ramagundam) में आयोजित एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बीआरएस के दस वर्षों के शासन में गरीबों की जरूरतों पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया और बीआरएस नेताओं ने सामंती मानसिकता के साथ शासन करते हुए लोगों को प्रताड़ित किया। उन्होंने कहा, ”तेलंगाना देने वाली कांग्रेस पार्टी को जनता ने सत्ता में लाया ताकि राज्य के लिए संघर्ष करने वाले तेलंगाना समाज को स्वतंत्रता, सामाजिक समानता, अवसर, संसाधन, रोजगार और आत्मसम्मान मिल सके।”

22,500 करोड़ की लागत से आवास योजना शुरू की गई

भट्टी विक्रमार्क ने कहा, ”पदयात्रा के दौरान मैंने इस क्षेत्र की जरूरतों को नोट किया और जनता की सरकार बनने के बाद हम उन सभी जरूरतों को क्रमबद्ध रूप से पूरा कर रहे हैं।” बेघर गरीबों को सम्मानजनक जीवन देने के लिए राज्य भर में 4.5 लाख इंदिरम्मा मकानों का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 22,500 करोड़ रुपए की लागत से इंदिरम्मा आवास योजना शुरू की गई है, जिसके तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 3,500 मकान सुनिश्चित किए जा रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पहले गरीबों को राशन दुकानों के माध्यम से मोटा चावल दिया जाता था। पदयात्रा के दौरान किया गया वादा गरीबों को महीन (फाइन) चावल देने का जनता की सरकार बनते ही लागू कर दिया गया।

96 लाख परिवारों को महीन चावल वितरित कर रहा तेलंगाना

उन्होंने कहा कि तेलंगाना देश का एकमात्र राज्य है जो एक साथ 96 लाख परिवारों को महीन चावल वितरित कर रहा है। उन्होंने बताया कि वित्त विभाग 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना के तहत गरीबों की ओर से हर महीने बिजली विभाग को बिलों का भुगतान कर रहा है और राज्य भर में 29 लाख कृषि पंप सेटों के बिजली बिल भी सरकार वहन कर रही है। भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि सिंगरेणी कोलियरीज तेलंगाना का मुकुटमणि है, जिसमें 42,000 से अधिक नियमित कर्मचारी और लगभग 40,000 आउटसोर्सिंग कर्मचारी कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि इस संस्थान की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

सिंगरेणी की विशेषज्ञता देश के किसी भी अन्य संस्थान से बेजोड़

खनन के क्षेत्र में सिंगरेणी की विशेषज्ञता देश के किसी भी अन्य संस्थान से बेजोड़ है। भविष्य में सिंगरेनी को दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ मिनरल्स) के खनन में भी प्रवेश करना चाहिए, जिससे यह वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बनेगी और अधिक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने आगे कहा कि सिंगरेणी कर्मचारियों के परिवारों को दुर्घटनाओं की स्थिति में परेशानी न हो, इसके लिए राज्य सरकार ने पहले ही 1 करोड़ रुपए का दुर्घटना बीमा घोषित किया है। यह बीमा कवरेज सभी बिजली क्षेत्र की संस्थाओं के कर्मचारियों और श्रमिकों तक भी बढ़ा दिया गया है।

प्रधानमंत्री विकलांग योजना 2025 क्या है?

दिव्यांगजनों को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जाती हैं, जिन्हें सामान्य रूप से प्रधानमंत्री विकलांग योजनाएं कहा जाता है। इनके अंतर्गत पेंशन, छात्रवृत्ति, स्वरोजगार सहायता, कृत्रिम अंग, कौशल प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। वर्ष 2025 में भी इन योजनाओं को डिजिटल आवेदन, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और सरल प्रक्रिया के माध्यम से लागू किया जा रहा है, ताकि पात्र लाभार्थियों को सीधा लाभ मिल सके।

इंदिराम्मा हाउस के लिए कौन पात्र है?

तेलंगाना सरकार की इंदिराम्मा हाउस योजना के तहत ऐसे गरीब परिवार पात्र माने जाते हैं जिनके पास पक्का मकान नहीं है। प्राथमिकता अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, विधवा और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को दी जाती है। लाभ के लिए राज्य का स्थायी निवासी होना, आय सीमा के भीतर होना और पहले किसी सरकारी आवास योजना का लाभ न लिया होना आवश्यक शर्तों में शामिल है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के फॉर्म कब तक भरे जाएंगे 2025 में?

आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चल रही इस योजना के अंतर्गत आवेदन प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से जारी रहती है। वर्ष 2025 में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए आवेदन राज्य सरकारों और केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित समय-सीमा में स्वीकार किए जाते हैं। आमतौर पर पात्र लाभार्थी ऑनलाइन पोर्टल या स्थानीय पंचायत, नगर पालिका के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। अंतिम तिथि राज्यों के अनुसार अलग-अलग घोषित की जाती है।

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