विशाखापट्टनम। प्रजला कथा ना आत्मकथा का विमोचन कार्यक्रम (Launch Ceremony) शनिवार को विशाखापत्तनम स्थित काकतीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया। यह पुस्तक भारत के पूर्व राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय की जीवनी है। कार्यक्रम में ओडिशा के राज्यपाल के. हरिबाबू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर विधायक गंटा श्रीनिवास राव, एमएलसी सोमू वीरराजू, पूर्व सांसद जी.वी.एल. नरसिम्हा राव, पूर्व मंत्री गुदिवाड़ा अमरनाथ, पूर्व विधायक करणम धर्मश्री सहित कई वरिष्ठ नेता और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। पूर्व सांसद जी.वी.एल. नरसिम्हा राव (G.V.L. Narasimha Rao) ने कहा कि बंडारू दत्तात्रेय ने अपने जीवन में विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए हर पद को गरिमा प्रदान की।
पूर्व राज्यपाल की आत्मकथा का विशाखापत्तनम में विमोचन
उन्होंने कहा कि दत्तात्रेय ने अपना पूरा जीवन भारतीय जनता पार्टी को समर्पित किया है और उनकी जीवनी से प्रेरणा लेनी चाहिए। एमएलसी सोमू वीरराजू ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी राष्ट्र के लिए कार्य करने वाला संगठन है। उन्होंने दत्तात्रेय के जीवन को सभी के लिए आदर्श बताया और कहा कि डिविसीमा चक्रवात के समय उनकी सेवाएं अविस्मरणीय रहीं। विधायक गंटा श्रीनिवास राव ने कहा कि राजनीति में पदों के साथ-साथ विरोधी भी होते हैं, लेकिन बंडारू दत्तात्रेय ऐसे नेता हैं जिनके कोई शत्रु नहीं रहे। उन्होंने यह भी कहा कि “अलाइ बलाइ” जैसे कार्यक्रमों को उत्तर आंध्र में भी आयोजित किया जाना चाहिए। पूर्व राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि राजनीति और व्यवसाय केवल लाभ के लिए नहीं बल्कि पवित्र सेवा के माध्यम हैं।
राजनीति का अर्थ केवल जनसेवा
उन्होंने कहा कि राजनीति का अर्थ केवल जनसेवा है और उन्होंने कभी राजनीति में आने की कल्पना नहीं की थी। ओडिशा के राज्यपाल के. हरिबाबू ने कहा कि दत्तात्रेय एक जन-आधारित नेता हैं जिन्होंने संघर्षों और कठिनाइयों के बावजूद सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के उनके प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं।
बंडारू दत्तात्रेय कौन थे?
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ राजनीतिज्ञ बंडारू दत्तात्रेय का जन्म 12 जून 1947 को हैदराबाद में हुआ। वह 7 जुलाई 2021 से हरियाणा के राज्यपाल रहे और 16वीं लोकसभा में सांसद व केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री भी रहे। उन्हें सिकंदराबाद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से 10वीं, 12वीं और 13वीं लोकसभा के लिए चुना गया था। उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय से बीएससी की डिग्री ली है। उन्हें जनता के बीच “दत्तन्ना” के नाम से जाना जाता है।
बंडारू दत्तात्रेय की आत्मकथा का नाम क्या है?
उनकी आत्मकथा का नाम हिंदी में “जनता की कहानी – मेरी आत्मकथा” है, जिसे 9 मई 2025 को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने नई दिल्ली के महाराष्ट्र सदन में जारी किया। तेलुगू में इसी आत्मकथा का नाम “प्रजला काथे – नाआ आत्मकथा” (जनता की कहानी ही मेरी आत्मकथा) है, जिसे 8 जून 2025 को हैदराबाद के शिल्पकला वेदिका में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जारी किया।
दत्तात्रेय का जीवन परिचय क्या है?
हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय का जन्म हैदराबाद के गौलीगुडा मोहल्ले में एक साधारण परिवार में हुआ था। उन्होंने अपना राजनीतिक करियर संघ प्रचारक के रूप में शुरू किया। आपातकाल के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया और 1980 में भाजपा की सदस्यता ली। पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने उन्हें एक ऐसा नेता बताया जिनका सार्वजनिक जीवन में कोई दुश्मन नहीं है और जो राज्यपाल पद पर रहते हुए भी सादगी से जीवन जीते हैं।
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