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IDPD : स्वास्थ्य जनता का मौलिक अधिकार है – विशेषज्ञ

Author Icon By Ajay Kumar Shukla
Updated: May 17, 2026 • 12:23 PM
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हैदराबाद। “स्वास्थ्य सेवा दया का विषय नहीं, बल्कि जनता का मौलिक अधिकार है।” यह बात कई वरिष्ठ चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने भारतीय डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवलपमेंट (IDPD) के 13वें राष्ट्रीय महासम्मेलन में कही। यह सम्मेलन शनिवार को हैदराबाद स्थित आईएमए भवन के डॉ. जी.के. किर्लोस्कर हॉल में भव्य रूप से शुरू हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता आईडिपीडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अरुण मित्र ने की। उद्घाटन सत्र में तेलंगाना राज्य की अतिरिक्त डीएमई (DME) डॉ. रमादेवी तथा एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर के. श्रीनाथ रेड्डी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। “चिकित्सा सेवाओं का आधुनिकीकरण – सभी के लिए समान स्वास्थ्य सेवाएँ” विषय पर प्रो. के. श्रीनाथ रेड्डी ने मुख्य वक्तव्य दिया।

आईडीपीडी के 13वें राष्ट्रीय सम्मेलन में जोर

उन्होंने कहा कि सरकार को स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए, लेकिन इस दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में आज भी लगभग 30 से 40 करोड़ लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध नहीं हैं। वैश्वीकरण, युद्ध, हिंसा और सामाजिक असमानताएँ सार्वजनिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रही हैं। मुख्य अतिथि डॉ. रमादेवी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल एक सेवा नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। डॉक्टरों को मरीजों को अपने परिवार के सदस्य की तरह समझकर उपचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए कई कदम उठा रही है। आईडीपीडी की वरिष्ठ सलाहकार अमर कौर ने कहा कि देश की बड़ी आबादी आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 70 करोड़ लोग उचित चिकित्सा सुविधाओं से दूर हैं, जो एक गंभीर स्थिति है।

50 प्रतिशत मौतें कुपोषण के कारण

उन्होंने यह भी कहा कि पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु में लगभग 50 प्रतिशत मौतें कुपोषण के कारण होती हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है। पूर्व सांसद अजीज ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य पर संसद में पर्याप्त चर्चा नहीं होती। वहीं सीपीआई नियंत्रण समिति के अध्यक्ष डॉ. के. नारायण ने कहा कि सरकारों द्वारा स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की अनदेखी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। सम्मेलन में उपस्थित विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए निर्धारित धन का उपयोग युद्ध और हथियारों पर किया जाना खतरनाक प्रवृत्ति है। उन्होंने कहा कि केवल शांति, निरस्त्रीकरण और सामाजिक न्याय के माध्यम से ही सभी को समान स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इस अवसर पर सीपीआई राष्ट्रीय सचिव के. रामकृष्ण और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य पश्य पद्म सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए रोजाना क्या खाएं?

संतुलित आहार को अच्छे स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। रोजाना हरी सब्जियां, ताजे फल, दालें, दूध, अनाज और पर्याप्त पानी का सेवन करना लाभकारी माना जाता है। शरीर को ऊर्जा और पोषण देने के लिए प्रोटीन, विटामिन और खनिज तत्व जरूरी होते हैं। अधिक तला-भुना और अत्यधिक मीठा भोजन सीमित मात्रा में लेने की सलाह दी जाती है। नियमित और पौष्टिक भोजन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने में मदद करता है।

क्या दूध स्वास्थ्य के लिए अच्छा है?

दूध को कैल्शियम, प्रोटीन और कई आवश्यक पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है। यह हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। बच्चों, बुजुर्गों और बढ़ते शरीर के लिए इसे लाभकारी माना जाता है। हालांकि कुछ लोगों को लैक्टोज असहिष्णुता जैसी समस्या हो सकती है, इसलिए जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सेवन करना उचित माना जाता है। संतुलित मात्रा में दूध का उपयोग स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है।

पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद को स्वस्थ जीवन का आधार माना जाता है। रोजाना शारीरिक गतिविधि करने से शरीर सक्रिय रहता है और कई बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। स्वच्छता बनाए रखना, पर्याप्त पानी पीना और तनाव कम करना भी जरूरी माना जाता है। धूम्रपान और अत्यधिक शराब जैसी हानिकारक आदतों से बचने की सलाह दी जाती है। समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक माना जाता है।

क्या गुड़ स्वास्थ्य के लिए अच्छा है?

गुड़ को आयरन और खनिज तत्वों का प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। सीमित मात्रा में इसका सेवन पाचन और ऊर्जा के लिए लाभकारी माना जा सकता है। कई लोग भोजन के बाद गुड़ का सेवन करना पसंद करते हैं। हालांकि इसमें प्राकृतिक शर्करा होती है, इसलिए अधिक मात्रा में सेवन करना उचित नहीं माना जाता। संतुलित मात्रा में उपयोग करने पर यह परिष्कृत चीनी की तुलना में बेहतर विकल्प माना जाता है।

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