New Delhi : सांसद वामशी कृष्णा ने केंद्र सरकार पर लगाया अन्याय का आरोप

By Ajay Kumar Shukla | Updated: March 25, 2026 • 8:51 PM

नई दिल्ली। पेद्दापल्ली के सांसद गड्डम वामशी कृष्णा (Vamshi Krishna) ने संसद में वित्त विधेयक पर बोलते हुए कहा कि तेलंगाना राज्य केंद्र को भारी कर योगदान देता है, लेकिन उसे वापसी में बहुत कम मिलता है। सांसद गड्डम वामशी कृष्णा ने कहा कि हम केंद्र को बड़ी राशि कर के रूप में देते हैं, लेकिन दुर्भाग्यवश हर एक रुपये के योगदान पर राज्य को केवल 30 पैसे ही मिलते हैं। अपने निर्वाचन क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्होंने एनटीपीसी, आरएफसीएल और सिंगरेणी की बड़ी कर योगदान को उजागर किया। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये का योगदान होता है, लेकिन केंद्र (Center) से केवल 100 से 150 करोड़ रुपये मिलते हैं, जो नगण्य हैं।

मजदूरों के लिए ईएसआई अस्पताल शामिल

उन्होंने कई लंबित मांगों का जिक्र किया, जिनमें कृषि विश्वविद्यालय, खनन विश्वविद्यालय, सिंगरेणी मजदूरों के लिए ईएसआई अस्पताल शामिल हैं, लेकिन केंद्र ने एक भी परियोजना के लिए निधि नहीं दी। उन्होंने सिंगरेणी मजदूरों की पेंशन 10,000 रुपये मासिक बढ़ाने की बार-बार की गई मांगों पर भी ध्यान आकर्षित किया और कहा कि केंद्र निगमों और विदेशी कंपनियों के प्रति उदार है, लेकिन गरीबों की अनदेखी करता है। वामशी ने अर्धचालक परियोजना के आंध्र प्रदेश में स्थानांतरित किए जाने का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि पेद्दापल्ली में 100 करोड़ रुपये की अर्धचालक सुविधा चाहिए थी, लेकिन अंतिम समय में अन्यायपूर्वक यह आंध्र प्रदेश चली गई। सांसद ने पर्यटन और सांस्कृतिक परियोजनाओं की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि धर्मापुरी के कोटी लिंगला मंदिर, मंथानी रामगिरी किला और पेड़ापल्ली में बौद्ध स्तूप के विकास के लिए निधि मांगी गई थी, लेकिन केंद्र ने एक भी रुपये की राशि नहीं दी।

मजदूर को 200 रुपये प्रतिदिन मिलने चाहिए थे

एमएनआरईजीए योजना का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि योजना के तहत मजदूर को 200 रुपये प्रतिदिन मिलने चाहिए थे, लेकिन पिछले 10 वर्षों में 7 लाख करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद केवल 200 रुपये ही दिए गए। उन्होंने इसे बड़ी घोटाला करार दिया। अंत में वामशी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमीरों को लाभ पहुंचाती है और गरीबों की अनदेखी करती है। उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र जनता के द्वारा, जनता के लिए और जनता का है, लेकिन यह सरकार हमारे देश के लोगों, हमारे गरीबों के खिलाफ फैसले ले रही है।’

लोकतंत्र से आप क्या समझते हैं?

ऐसी शासन व्यवस्था को कहा जाता है, जिसमें जनता सर्वोच्च होती है और अपने प्रतिनिधियों को चुनकर सरकार बनाती है। इसमें नागरिकों को वोट देने, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समान अधिकार प्राप्त होते हैं। निर्णय जनता के हित में लिए जाते हैं और सरकार जनता के प्रति जवाबदेह होती है। इस प्रणाली में कानून का शासन और पारदर्शिता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लोकतंत्र का जनक कौन था?

आधुनिक लोकतंत्र की अवधारणा का श्रेय प्राचीन एथेंस को दिया जाता है, जहां पहली बार जनता की भागीदारी से शासन चलाने की व्यवस्था विकसित हुई। हालांकि किसी एक व्यक्ति को इसका जनक नहीं माना जाता, लेकिन क्लाइसथनीज को एथेंस में लोकतांत्रिक सुधारों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

लोकतंत्र के 4 गुण कौन से हैं?

मुख्य विशेषताओं में समानता, स्वतंत्रता, न्याय और भागीदारी शामिल होते हैं। समानता के तहत सभी नागरिकों को बराबर अधिकार मिलते हैं। स्वतंत्रता से अभिव्यक्ति और विचार रखने का अधिकार मिलता है। न्याय व्यवस्था सभी के लिए निष्पक्ष होती है। भागीदारी का अर्थ है कि लोग चुनाव और अन्य माध्यमों से शासन में अपनी भूमिका निभाते हैं, जिससे प्रणाली मजबूत और जवाबदेह बनती है।

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