हैदराबाद। साइबराबाद एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) ने एक सप्ताह तक चले विशेष अभियान के दौरान रात्रि छापेमारी कर मानव तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। इस दौरान छह तस्करी पीड़ितों को मुक्त कराया गया तथा छह यौनकर्मियों और 11 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया। अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम (पिटा) के तहत दर्ज दो मामलों में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। डीसीपी (महिला एवं बाल सुरक्षा शाखा) के. सृजना ने बताया कि साइबराबाद शी-टीम्स (Cyberabad She-Teams) ने 137 डिकॉय ऑपरेशन किए, जिनमें सार्वजनिक स्थानों पर अशोभनीय गतिविधियों में लिप्त 66 लोगों को रंगे हाथों पकड़ा गया।
महिलाओं से 23 शिकायतें भी हुईं प्राप्त
59 मामलों में लघु अपराध दर्ज किए गए, जबकि शेष को परामर्श देकर छोड़ा गया। इस अवधि में महिलाओं से 23 शिकायतें भी प्राप्त हुईं। पुलिस की पहल के तहत पारिवारिक परामर्श एवं सीडीईडब्ल्यू केंद्रों के माध्यम से वैवाहिक विवादों में फंसे 22 दंपतियों का सफलतापूर्वक पुनर्मिलन कराया गया। इसके अलावा, एएचटीयू और शी-टीम्स ने व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें 7,229 लोगों ने भाग लिया। इन कार्यक्रमों में मानव एवं बाल तस्करी, छेड़छाड़, साइबर उत्पीड़न, बाल अधिकार, बाल विवाह, साइबर धोखाधड़ी तथा हेल्पलाइन नंबर 181, 1098, 100 और 1930 के उपयोग के बारे में जानकारी दी गई।
मानव तस्करी की सजा क्या है?
भारतीय कानून में मानव तस्करी को गंभीर अपराध माना गया है। आईपीसी की धारा 370 के तहत दोष सिद्ध होने पर अपराध की प्रकृति के अनुसार सात वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
पुरुषों की मानव तस्करी क्यों की जाती है?
अधिकतर जबरन मजदूरी, निर्माण कार्य, खदानों, फैक्ट्रियों और अवैध गतिविधियों में काम कराने के लिए पुरुषों की तस्करी की जाती है। गरीबी, बेरोजगारी और बेहतर नौकरी का लालच देकर उन्हें शोषण का शिकार बनाया जाता है।
मानव तस्करी से आप क्या समझते हैं?
किसी व्यक्ति को धोखे, दबाव, लालच या बल प्रयोग से एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाकर उसका शोषण करना मानव तस्करी कहलाता है। इसमें श्रम शोषण, यौन शोषण, घरेलू गुलामी और अंग तस्करी शामिल हैं।
मानव तस्करी को रोकने के उपाय क्या हैं?
जागरूकता अभियान, शिक्षा का प्रसार और रोजगार के अवसर बढ़ाना इसके प्रमुख उपाय हैं। सख्त कानूनों का पालन, पुलिस और प्रशासन की सक्रियता, सीमा निगरानी तथा पीड़ितों के पुनर्वास से मानव तस्करी पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
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