आरटीसी कर्मचारियों के ”चलो सचिवाल” कार्यक्रम को समर्थन
हैदराबाद। तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता ने राज्य सरकार (state government) पर आरटीसी कर्मचारियों से किए वादों से मुकरने का आरोप लगाते हुए आगामी बजट में आरटीसी विलय के क्रियान्वयन के लिए विशेष धनराशि आवंटित करने की मांग की है। बंजारा हिल्स (Banjara Hills) स्थित जागृति कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि टीएसआरटीसी के सरकार में विलय का विधेयक पहले ही पारित हो चुका है, फिर भी कांग्रेस सरकार इसे लागू करने में जानबूझकर देरी कर रही है। उन्होंने कहा कि बजट सत्र में लंबित आश्वासनों, विशेषकर आरटीसी विलय के लिए पृथक निधि का प्रावधान किया जाना चाहिए। कविता ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव से पहले आरटीसी विलय का वादा किया गया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकार कर्मचारियों से मुंह मोड़ चुकी है।
आरटीसी कर्मियों से 16 से 18 घंटे तक काम कराया जा रहा
उन्होंने आरोप लगाया कि आरटीसी कर्मियों से 16 से 18 घंटे तक काम कराया जा रहा है, जो संगठित शोषण के समान है। उन्होंने बिना बसों की संख्या बढ़ाए मुफ्त बस सेवा शुरू करने के फैसले पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि दिव्यांगजनों के लिए भी मुफ्त बस सुविधा दी जानी चाहिए। साथ ही ‘महालक्ष्मी योजना’ के तहत जारी की गई धनराशि पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग करते हुए पूछा कि घोषित 300 करोड़ रुपये अथवा वर्तमान आवश्यकता के अनुसार 600 करोड़ रुपये में से वास्तव में कितनी राशि जारी की गई है। कविता ने मामूली कारणों से आरटीसी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने की निंदा की। उन्होंने कहा कि टिकट मशीनों में खराबी के कारण परिचालकों को हटाया जा रहा है और अत्यधिक कार्य दबाव के चलते चालकों की हृदयाघात से मृत्यु तक हो रही है।
सभी निष्कासित कर्मियों की तत्काल बहाली की मांग
उन्होंने लगभग एक हजार बर्खास्त कर्मचारियों सहित सभी निष्कासित कर्मियों की तत्काल बहाली की मांग की। राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कविता ने कहा कि मंत्रिमंडल की बैठकें दिल्ली में आयोजित करना तेलंगाना के स्वाभिमान के खिलाफ है और इन्हें राज्य सचिवालय में ही आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने 24 तारीख को प्रस्तावित आरटीसी कर्मचारियों के ”चलो सचिवाल” कार्यक्रम को तेलंगाना जागृति का पूर्ण समर्थन देने की घोषणा करते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी जारी रखी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
दक्षिण मध्य रेलवे का मुख्यालय कहाँ है?
इस ज़ोन का मुख्यालय सिकंदराबाद में स्थित है। यह स्थान प्रशासनिक और परिचालन गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। यहीं से विभिन्न मंडलों के कार्यों की निगरानी और समन्वय किया जाता है। आधुनिक नियंत्रण कक्ष, प्रबंधन विभाग और अधिकारी इसी मुख्यालय से पूरे क्षेत्र की रेल सेवाओं को संचालित करते हैं, जिससे यात्रियों को सुरक्षित और सुचारु रेल सुविधा मिल सके।
दक्षिण मध्य रेलवे में कितने मंडल हैं?
इस रेलवे ज़ोन में कुल छह मंडल कार्यरत हैं। ये मंडल हैं—सिकंदराबाद मंडल, हैदराबाद मंडल, विजयवाड़ा मंडल, गुंटूर मंडल, नांदेड़ मंडल और गुंतकल मंडल। प्रत्येक मंडल अपने-अपने क्षेत्र में ट्रेनों के संचालन, रखरखाव और यात्री सेवाओं की जिम्मेदारी निभाता है।
दक्षिण मध्य रेलवे क्या है?
यह भारतीय रेलवे का एक महत्वपूर्ण ज़ोन है, जो दक्षिण भारत के कई राज्यों में रेल सेवाएँ संचालित करता है। इसकी स्थापना 1966 में की गई थी। यह ज़ोन तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में यात्री और मालगाड़ियों का संचालन करता है। क्षेत्रीय आर्थिक विकास और यातायात सुविधा में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
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