Mayor candidates defeat : तेलंगाना नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने राजनीति में धनबल की भूमिका पर नई बहस छेड़ दी है। करोड़ों रुपये खर्च कर मेयर और चेयरमैन पदों के लिए मैदान में उतरे कई दिग्गज नेता अपने ही वार्ड में हार गए। पार्टियों को बहुमत मिलने के बावजूद प्रमुख उम्मीदवारों की हार स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है।
निजामाबाद नगर निगम में कांग्रेस के मेयर पद के संभावित उम्मीदवार कातिपल्ली शमंता रेड्डी 19वें डिवीजन में भाजपा प्रत्याशी से हार गईं। भारी प्रचार खर्च और बकाया कर भुगतान जैसी तैयारियों के बावजूद उन्हें मतदाताओं का समर्थन नहीं मिला।
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रंगारेड्डी जिले के मोइनाबाद और शंकरपल्ली क्षेत्रों में नकद (Mayor candidates defeat) और सोना बांटने के आरोप सामने आए, फिर भी मतदाताओं ने उम्मीदवारों को नकार दिया। कई जगहों पर हजारों रुपये प्रति वोट दिए जाने के बावजूद हार ने मतदाताओं की बदलती सोच को दर्शाया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष से ज्यादा पार्टी के अंदरूनी गुटबाज़ी और मतभेद हार का मुख्य कारण बने। परिणामों से स्पष्ट है कि मतदाता अब पैसे के बजाय उम्मीदवार की छवि, स्थानीय मुद्दों और जनसंपर्क को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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