पामुनूरु में विकास कार्यों की आधारशिला रखीं
हैदराबाद। मुलुगु जिले की कर्रेगुट्टालू पहाड़ियों का दौरा करते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) शिवधर रेड्डी ने इस क्षेत्र को नक्सल प्रभाव से पूर्णतः मुक्त घोषित किया। अपने दौरे के दौरान उन्होंने पामुनूरु गांव में विभिन्न विकास कार्यों की आधारशिला रखी। सभा को संबोधित करते हुए डीजीपी ने कहा कि कर्रेगुट्टालू क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों का कोई अस्तित्व नहीं है और गुट्टी कोया आदिवासी समुदाय के विकास एवं कल्याण के लिए निरंतर सहयोग दिया जाएगा। कल्याणकारी योजनाओं के तहत उन्होंने पामुनूरु गांव के सात जरूरतमंद परिवारों को एक ऑटो-रिक्शा (auto rickshaw), एक दोपहिया वाहन तथा मासिक आवश्यक वस्तुओं की सहायता प्रदान की।
प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की भी घोषणा की
डीजीपी ने कर्रेगुट्टालू की प्राकृतिक सुंदरता को ध्यान में रखते हुए इसे एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा भी की। पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यहां एक नए पुलिस चौकी की आधारशिला रखी गई। साथ ही वन विभाग, राजस्व विभाग, सीआरपीएफ और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक अंतर-विभागीय समन्वय केंद्र स्थापित करने की योजना भी घोषित की गई।डीजीपी ने पामुनूरु स्थित सीआरपीएफ की 39वीं बटालियन के फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस का दौरा किया और वहां तैनात जवानों से मुलाकात की।

पुलिस और सीआरपीएफ के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर दिया बल
उन्होंने जवानों की सेवा भावना की सराहना करते हुए पुलिस और सीआरपीएफ के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि कर्रेगुट्टालू क्षेत्र को स्थायी रूप से नक्सल-मुक्त बनाए रखा जा सके। इसके बाद डीजीपी शिवधर रेड्डी ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक तेलंगाना, सुवर्णा के साथ मोरमोरू में महिला-संचालित नर्सरी का उद्घाटन किया। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना और नर्सरी आधारित गतिविधियों के माध्यम से स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना है। तीसरे चरण के सड़क सुरक्षा अभियान के अंतर्गत “ एराइव एलाइव” कार्यक्रम का आयोजन वेंकटापुरम पुलिस के तत्वावधान में किया गया, जिसमें लगभग 3,000 लोगों ने भाग लिया।
डीजीपी ने वितरित किए 200 हेलमेट
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डीजीपी ने 200 हेलमेट वितरित किए और लोगों से सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की। साथ ही उन्होंने वाहन चालकों के लिए निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का उद्घाटन भी किया। कार्यक्रम पुलिस अधीक्षक, मुलुगु जिला, सुधीर आर. केकन के पर्यवेक्षण में आयोजित किए गए। इस अवसर पर पीसीसीएफ सुवर्णा, एडीजी अनिल कुमार, एसआईबी आईजी सुमति, सीआरपीएफ आईजी विक्रम तथा एएसपी एटूरुनगरम मनन भट्ट सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
DGP से ऊपर कौन होता है?
पद के अनुसार राज्य पुलिस में डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) सबसे उच्च अधिकारी होता है। उसके ऊपर सामान्यतः कोई पुलिस पद नहीं होता, लेकिन प्रशासनिक रूप से वह राज्य सरकार के अधीन कार्य करता है। केंद्र स्तर पर गृह मंत्रालय और राजनीतिक नेतृत्व नीति और दिशा तय करते हैं। इसलिए संगठन के अंदर डीजीपी शीर्ष पर होता है, जबकि शासन स्तर पर सरकार उससे ऊपर मानी जाती है।
वर्तमान में पुलिस महानिदेशक कौन है?
नाम राज्य के अनुसार अलग-अलग होता है, क्योंकि हर राज्य का अपना पुलिस महानिदेशक होता है। भारत में एक ही डीजीपी नहीं होता, बल्कि प्रत्येक राज्य में अलग अधिकारी इस पद पर नियुक्त होता है। इसलिए सटीक जानकारी के लिए यह जानना जरूरी है कि आप किस राज्य के डीजीपी के बारे में पूछ रहे हैं, तभी सही नाम बताया जा सकता है।
पुलिस को कौन सस्पेंड कर सकता है?
सस्पेंड करने का अधिकार वरिष्ठ अधिकारियों के पास होता है। आमतौर पर संबंधित विभाग का उच्च अधिकारी, जैसे एसपी, डीआईजी या आईजी स्तर का अधिकारी अपने अधीन कार्यरत पुलिसकर्मी को निलंबित कर सकता है। इसके अलावा राज्य सरकार भी विशेष परिस्थितियों में यह कार्रवाई कर सकती है। यह निर्णय अनुशासनहीनता या किसी गंभीर आरोप के आधार पर लिया जाता है।
डीजीपी की सैलरी कितनी है?
सैलरी 7वें वेतन आयोग के अनुसार निर्धारित होती है। डीजीपी स्तर के अधिकारी को लगभग 2,25,000 रुपये प्रति माह (फिक्स्ड) वेतन मिलता है। इसके साथ ही सरकारी आवास, वाहन, सुरक्षा, मेडिकल और अन्य भत्ते जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। यह पुलिस विभाग का सबसे उच्च वेतनमान माना जाता है, जो पद की जिम्मेदारियों के अनुसार तय किया गया है।
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