हैदराबाद। हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस (Police) ने डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी से जुड़े एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में विनीत राज, थिरुपतैया और विश्वनाथम शामिल हैं, जबकि मुख्य आरोपी संदीप उर्फ एलेक्स अब भी फरार है। जांच में पता चला कि आरोपी थिरुपतैया और विश्वनाथम देशभर में दर्ज पांच मामलों में शामिल रहे हैं, जिनमें दो मामले तेलंगाना (Telangana) राज्य से संबंधित हैं।
फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट का किया था
मामले की शिकायत 71 वर्षीय हैदराबाद निवासी चगंती हनुमंथा राव ने की थी, जिन्हें साइबर ठगों ने सीबीआई अधिकारी बनकर डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर 7 नवंबर से 14 नवंबर 2025 के बीच कुल 1,92,50,070 रुपए विभिन्न खातों में स्थानांतरित करवा लिए। ठगों ने पीड़ित को आधार के दुरुपयोग के फर्जी आरोप में फंसाने की धमकी दी, वीडियो कॉल पर नकली पहचान दिखाते हुए उन्हें डराया और दिल्ली क्राइम ब्रांच की फर्जी एफआईआर भेजकर धोखा दिया।
मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग तस्करी या साइबर अपराध में फंसाने की धमकी देकर गैंग करता था वसूली
जांच में सामने आया कि यह गैंग आधिकारिक एजेंसियों का रूप धारण कर लोगों को धमकाता था, स्पूफ्ड कॉल, नकली वर्दी, फर्जी दस्तावेज और वीडियो कॉल का इस्तेमाल करके पीड़ितों का विश्वास जीतता था। अपराधी पीड़ितों को गंभीर आरोपों जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग तस्करी या साइबर अपराध में फंसाने का डर दिखाकर उनसे भारी रकम वसूलते थे।
‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं : पुलिस
पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। यह कार्रवाई इंस्पेक्टर के. सतीश रेड्डी के नेतृत्व में एसआई श्रीकांत और उनकी टीम ने सफलतापूर्वक की। साइबर क्राइम पुलिस ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा फोन, यूपीआई, क्रिप्टो या अन्य माध्यमों से कभी भी जुर्माना या सुरक्षा जमा राशि की मांग नहीं की जाती। ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है और नागरिक किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें या cybercrime.gov.in पोर्टल का उपयोग करें।
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