हैदराबाद। तेलंगाना में दिसंबर में आयोजित होने वाले ग्लोबल समिट के हिस्से के रूप में राज्य सरकार अपने महत्वाकांक्षी ‘ विज़न डॉक्यूमेंट 2047’ (“Vision Document 2047”) को प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है। इस दस्तावेज़ का एक महत्वपूर्ण अंग ‘तेलंगाना एग्रीकल्चर – 2047 एग्री चैप्टर’ (“Telangana Agriculture – 2047 Agri Chapter) होगा, जो राज्य के कृषि क्षेत्र को वर्ष 2047 तक विश्वस्तरीय बनाने की रणनीति तय करेगा।
तेलंगाना सरकार का कृषि क्षेत्र को अभूतपूर्व प्रोत्साहन
पिछले दो वर्षों में किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तेलंगाना सरकार ने कृषि क्षेत्र को अभूतपूर्व प्रोत्साहन दिया है। किसान हितों को केंद्र में रखकर राज्य सरकार ने अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र को आवंटित किया है तथा किसानों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक स्तर पर कर्ज माफी लागू की है। इसके साथ ही रैतु भरोसा योजना के माध्यम से प्रति एकड़ 12,000 रुपये की निवेश सहायता प्रदान कर किसानों को स्थिरता, आत्मविश्वास और निवेश क्षमता उपलब्ध कराई गई है।
केंद्र सरकार से सीमित समर्थन के बावजूद राज्य ने सभी फसलों की खरीद समर्थन मूल्य पर सुनिश्चित कर किसानों के प्रति अपने भरोसे को और मजबूत किया है। इसी क्रम में, ‘तेलंगाना एग्रीकल्चर – 2047 एग्री चैप्टर’ को तैयार करने के लिए कृषि, बागवानी, अनुसंधान और मार्केटिंग संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित विस्तृत अध्ययन कर रहे हैं। इसमें कृषि के भविष्य से जुड़े सभी पहलुओं रणनीति, नीति, अवसंरचना, आधुनिक तकनीक और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का व्यापक विश्लेषण शामिल है।
मंत्री ने रिपोर्ट को और प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए
वरिष्ठ अधिकारियों ने रिपोर्ट के प्रारूप पर अंतिम चर्चा करने के लिए कृषि, मार्केटिंग, हैंडलूम तथा टेक्सटाइल मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव से भेंट की। मंत्री ने रिपोर्ट को और प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि राज्य को 2047 तक 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के अनुरूप कृषि क्षेत्र का संतुलित और टिकाऊ विकास अत्यंत आवश्यक है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि रिपोर्ट में किसान-केंद्रित योजनाएँ, किसानों की आय में वृद्धि, उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार तथा कृषि में आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग को प्रमुख फोकस क्षेत्रों के रूप में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में कृषि अनुसंधान और एक्सटेंशन गतिविधियों की अपार संभावनाएँ हैं, जिन्हें वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए ठोस योजनाएँ बनानी चाहिए।
तेलंगाना को ग्लोबल सीड हब के रूप में विकसित किया जाए : मंत्री
मंत्री ने फसल उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण, क्लाइमेट-स्मार्ट कृषि, जल उपयोग दक्षता, तथा प्रिसिजन फार्मिंग जैसे आधुनिक तरीकों को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वभर में कृषि क्षेत्र में अपनाई जा रही नवीन तकनीकों को शीघ्र लागू किया जाए ताकि तेलंगाना का कृषि क्षेत्र और अधिक मजबूत हो सके। इसके साथ ही, किसानों के उत्पादों के लिए बेहतर मार्केटिंग सुविधाएँ उपलब्ध कराने तथा वैल्यू-एडेड एग्री-प्रोसेसिंग को बड़े पैमाने पर विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
मंत्री ने सुझाव दिया कि तेलंगाना को ग्लोबल सीड हब के रूप में विकसित किया जाए, जिससे इसे विश्वस्तरीय बीज उत्पादन केंद्र बनाया जा सके। उन्होंने बीज गुणवत्ता, प्रमाणन प्रणाली और निर्यात मानकों को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई। बैठक में कृषि सचिव श्री सुरेंद्र मोहन, कृषि निदेशक श्री गोपी, हॉर्टिकल्चर निदेशक सुश्री यास्मीन बाशा, कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जनैया तथा हॉर्टिकल्चर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजीरेड्डी उपस्थित रहे।
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