बीएसएस के अध्यक्ष बिनय कुमार यादव ने रखीं उत्तर भारतीयों की बात
हैदराबाद। बिहार सहयोग समिति तेलंगाना के अध्यक्ष बिनय कुमार यादव ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सचिव और तेलंगाना कांग्रेस के सह-प्रभारी सचिन सावंत ने प्रजा भवन, हैदराबाद में मुलाकात की। इस दौरान बिनय कुमार यादव ने उत्तरभारतीय समाज से जुड़े कई मुद्दों पर उनका ध्यान आकृष्ट कराया। इस मुलाकात के दौरान सचिन सावंत ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस सरकार मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और पीसीसीसी अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ की अगुवाई चौतरफा विकास कर रही है। बिना किसी भेदभाव के सभी के लिए काम किया जा रहा है। कांग्रेस (Congress) पार्टी की सरकार जनता की सरकार है। कांग्रेस ने कभी सत्ता और कुर्सी के लिए संघर्ष नहीं करता है। वह लोगों के भला चाहती है।
उत्तरभारतीय समाज के लोग बहुत ही मिलनसार
कांग्रेस हमेशा गरीबों, कमजोरों, युवाओं के हक के लिए लड़ती है। उन्होंने कहा कि उत्तरभारतीय समाज के लोग बहुत ही मिलनसार और कठिन मेहनत करने वाला है। उनका कांग्रेस का गहरा रिश्ता है। कांग्रेस उनकी भलाई के लिए तेलंगाना में हर संभव काम करेगी। सावंत ने कहा कि कई पीड़ी से राजस्थान, बिहार, उत्तरप्रदेश आदि देश के दूसरे राज्यों से लोग आकर तेलंगाना के विकास में अहम भूमिका निभा रहे है। अब इनमें से कई परिवारों की जन्म और कर्मभूमि अब तेलंगाना बन चुका है। तेलंगाना में किसी के साथ भेदभाव नहीं है। कानून और नियमों का पालन करने वालों के लिए यहां कोई परेशानी नहीं है। सरकार उत्तरभारतियों की समस्याओं का समाधान करने का पूरा प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले जीएचएमसी चुनावों में सभी को मिलकर काम करना होगा। इस अवसर पर प्रमुख रुप से तेलंगाना भाषाई अल्पसंख्यक कांग्रेस के चेयरमैन राजेश अग्रवाल भी मौजूद रहे।
उत्तर भारत में कौन-कौन से राज्य हैं?
आम तौर पर उत्तर भारत में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली को शामिल किया जाता है। कुछ परिभाषाओं में जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख भी जोड़े जाते हैं। यह क्षेत्र संस्कृति, भाषा और इतिहास की दृष्टि से काफी समृद्ध और विविधतापूर्ण माना जाता है।
उत्तर भारत का पुराना नाम क्या था?
इतिहास में इस क्षेत्र को “आर्यावर्त” कहा जाता था। यह नाम प्राचीन भारतीय ग्रंथों में मिलता है, जहां गंगा-यमुना के मैदान और आसपास के क्षेत्रों को इस नाम से जाना जाता था। आर्यावर्त का अर्थ होता है “आर्यों का निवास स्थान”। समय के साथ भौगोलिक और राजनीतिक बदलाव हुए और अब इसे सामान्य रूप से उत्तर भारत के नाम से जाना जाता है।
उत्तर भारत में कौन-कौन से जिले आते हैं?
प्रशासनिक रूप से जिले राज्यों के अंतर्गत आते हैं, इसलिए उत्तर भारत के सभी राज्यों के अपने-अपने अलग जिले हैं। जैसे उत्तर प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि राजस्थान, हरियाणा और अन्य राज्यों के भी अपने जिले हैं। कुल मिलाकर उत्तर भारत में सैकड़ों जिले आते हैं, जो संबंधित राज्य सरकारों द्वारा संचालित और विभाजित किए गए हैं।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :