कस्टोडियल मृत्यु मामले में टीजीएचआरसी का फैसला
हैदराबाद। तेलंगाना मानवाधिकार आयोग (TGHRC) ने 2017 में रिमांड में मृत बंदी मक्कला हनमंतु उर्फ नानी के परिवार को 5 लाख रुपये मुआवजा देने की सिफारिश की है। आयोग ने बंदी के निधन के लिए जेल प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। 25 फरवरी, 2026 के आदेश में न्यायमूर्ति शमीम अख्तर की अध्यक्षता वाले आयोग ने पाया कि बंदी की मौत जेल परिसर में उपलब्ध तार से फांसी के कारण हुई। मजिस्ट्रियल जांच और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर आयोग ने मौत को दमन से हुई दम घुटने की श्रेणी में रखा। आयोग ने कहा कि जेल परिसर में तार की उपलब्धता गंभीर पर्यवेक्षण (Strict Supervision) की कमी को दर्शाती है। आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत बंदियों को जीवन की सुरक्षा का अधिकार होने पर जोर देते हुए राज्य को जिम्मेदार ठहराया और मुआवजा देने का निर्देश दिया। इसके बाद आयोग ने मामले को बंद कर दिया।
मुआवजा का क्या मतलब होता है?
किसी व्यक्ति को हुए नुकसान, हानि या क्षति की भरपाई के रूप में दी जाने वाली धनराशि या सहायता को मुआवजा कहा जाता है। यह प्राकृतिक आपदा, दुर्घटना, फसल खराब होने या सरकारी अधिग्रहण जैसी स्थितियों में दिया जाता है। इसका उद्देश्य प्रभावित व्यक्ति की आर्थिक मदद करना और उसकी स्थिति को सामान्य बनाने में सहयोग करना होता है।
किसानों को मुआवजा कितना मिलेगा?
मिलने वाली राशि निश्चित नहीं होती, क्योंकि यह फसल के प्रकार, नुकसान की मात्रा और राज्य सरकार की नीति पर निर्भर करती है। आमतौर पर प्रति हेक्टेयर कुछ हजार से लेकर अधिक राशि तक सहायता दी जाती है। केंद्र और राज्य सरकारें अलग-अलग योजनाओं के तहत यह मुआवजा तय करती हैं, इसलिए हर क्षेत्र में इसकी रकम अलग हो सकती है।
मुआवजा कब आएगा 2026 में?
भुगतान का समय स्थिति और सरकारी प्रक्रिया पर निर्भर करता है। आमतौर पर नुकसान का सर्वे होने के बाद कुछ हफ्तों या महीनों के भीतर राशि जारी की जाती है। 2026 में भी यही प्रक्रिया लागू रहने की संभावना है। संबंधित विभाग द्वारा सत्यापन और स्वीकृति के बाद ही पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजा जाता है।
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