हैदराबाद। तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी (DGP Shivdhar Reddy) ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि सोशल मीडिया के नाम पर किसी की छवि धूमिल करना या चरित्र हनन करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डीजीपी शिवधर रेड्डी ने बताया कि उन्होंने पदभार ग्रहण करते समय ही सोशल मीडिया को लेकर गंभीर चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Social media platforms) पर व्यक्तिगत हमले, शील हनन और कैरेक्टर असैसिनेशन करने वालों पर बिना किसी नरमी के कार्रवाई होगी।
पदभार संभालते ही दी थी गंभीर चेतावनी
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति, उसके परिवार या परिवार के सदस्यों के बारे में झूठी और अपमानजनक खबरें फैलाना अपराध है और इस तरह की गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डीजीपी ने कहा कि फेक न्यूज फैलाकर निजी जीवन में दखल देना और झूठे आरोप लगाना कानूनन अपराध है। सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के दायरे में, चार दीवारों के भीतर की जाने वाली आलोचना से हमें कोई आपत्ति नहीं है।’ डीजीपी शिवधर रेड्डी ने दो टूक शब्दों में कहा कि लेकिन यदि कोई व्यक्ति सीमा लांघकर सोशल मीडिया का दुरुपयोग करेगा, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई निश्चित है।
DGP से ऊपर कौन होता है?
राज्य स्तर पर पुलिस व्यवस्था में इससे ऊपर कोई नियमित पद नहीं होता। हालांकि प्रशासनिक दृष्टि से मुख्य सचिव या गृह सचिव जैसे अधिकारी वरिष्ठ माने जाते हैं, पर पुलिस विभाग के भीतर सर्वोच्च रैंक यही होती है और सभी वरिष्ठ अधिकारी इसके अधीन कार्य करते हैं।
डीजीपी का मतलब क्या होता है?
यह संक्षिप्त रूप Director General of Police का है। यह पद राज्य पुलिस बल का प्रमुख होता है, जो कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन, सुरक्षा नीति और पूरे राज्य में पुलिस संचालन की जिम्मेदारी संभालता है।
DGP की नियुक्ति कौन करता है?
केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य सरकार इसकी नियुक्ति करती है। चयन प्रक्रिया में यूपीएससी की भूमिका होती है और अंतिम नियुक्ति राज्य मंत्रिमंडल तथा राज्यपाल की स्वीकृति से की जाती है।
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