DCM : ग्राम पंचायतों के लिए स्थायी भवन बनाए जाएँ – भट्टी

By Ajay Kumar Shukla | Updated: March 11, 2026 • 9:05 AM

उपमुख्यमंत्री ने मंत्रियों के साथ समीक्षा बैठक की

हैदराबाद। उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क (Bhatti Vikramark) ने कहा कि राज्य की जिन ग्राम पंचायतों के पास अभी स्थायी भवन नहीं हैं, उन्हें अगले तीन वर्षों के भीतर स्थायी भवन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। उन्होंने पंचायत राज विभाग को इस संबंध में योजनाएँ तैयार कर उनके क्रियान्वयन के लिए आगे बढ़ने का निर्देश दिया। मंगलवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर सचिवालय में आयोजित बजट पूर्व लेनदेन के तहत उपमुख्यमंत्री ने मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव, सीतक्का, पोंगुलेती श्रीनिवास रेड्डी और गद्दाम विवेक के साथ समीक्षा बैठक की।

बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि जहाँ भूमि उपलब्ध हो, वहाँ तहसीलदार कार्यालय और मंडल विकास अधिकारी कार्यालय का निर्माण एक साथ किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों (Anganwadi Centres) में बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। बच्चों के मस्तिष्क के स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ छोटे बच्चों के लिए उपयुक्त शिक्षण पद्धतियाँ भी लागू की जानी चाहिए।

सड़कों पर भीख माँगने की प्रवृत्ति जारी रखे हुए हैं

भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में कुछ लोग शिशुओं को लेकर सड़कों पर भीख माँगने की प्रवृत्ति जारी रखे हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे बच्चों को शिशु विहार केंद्रों में लाकर उनके कल्याण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएँ। उन्होंने कहा कि सड़क पर रहने वाले बच्चे दिन में तेज धूप और वर्षा ऋतु में बारिश के बीच रहते हैं, जिससे उनका अमूल्य बचपन नष्ट हो रहा है, और ऐसी स्थिति को जारी नहीं रहने दिया जाना चाहिए। उन्होंने शिशु विहार केंद्रों में आधुनिक रसोईघर बनाने का भी निर्देश दिया।

उपमुख्यमंत्री ने आगे निर्देश दिया कि उन्नत प्रौद्योगिकी केंद्रों में रोजगार उन्मुख पाठ्यक्रम शुरू किए जाएँ। वैश्विक सम्मेलन के दौरान जिन कंपनियों ने समझौता किया था, उनसे संपर्क कर उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रम इन केंद्रों में प्रारंभ किए जाएँ। उन्होंने कहा कि क्योर, प्योर और रेयर नीति के अंतर्गत आने वाले उद्योगों को ध्यान में रखते हुए उन्नत प्रौद्योगिकी केंद्रों में संबंधित पाठ्यक्रम तैयार किए जाएँ और उन्हें कौशल विश्वविद्यालय से जोड़ा जाए।

आदिवासी संस्थाओं के माध्यम से ही किया जाना चाहिए

आदिवासी क्षेत्रों में खनन के विषय में उन्होंने कहा कि रेत खनन केवल आदिवासी संस्थाओं के माध्यम से ही किया जाना चाहिए और समेकित जनजातीय विकास एजेंसियों को उन्हें पूरा सहयोग देना चाहिए। आदिवासी समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें उद्यमी बनाने के प्रयास किए जाने चाहिए। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य के पर्यटन क्षेत्र को उच्च स्तर तक विकसित करने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। उन्होंने कवाल और श्रीशैलम जैसे बाघ क्षेत्रों को विकसित करने तथा पर्यावरण पर्यटन और मंदिर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए योजनाएँ तैयार करने का सुझाव दिया।

1 ग्राम पंचायत में 5 साल में कितना बजट आता है?

ग्राम पंचायत को मिलने वाला बजट गांव की आबादी, विकास योजनाओं और सरकारी अनुदान पर निर्भर करता है। आमतौर पर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं जैसे मनरेगा और वित्त आयोग अनुदान के माध्यम से धन दिया जाता है। कई जगह एक ग्राम पंचायत को पांच वर्षों में लगभग 50 लाख से 2 करोड़ रुपये तक का बजट विभिन्न योजनाओं के तहत मिल सकता है, जिसका उपयोग सड़क, पानी, स्वच्छता और विकास कार्यों में किया जाता है।

सिद्धार्थनगर में कितनी ग्राम पंचायतें हैं?

सिद्धार्थनगर जिला उत्तर प्रदेश के प्रमुख जिलों में से एक है। इस जिले में लगभग 1,100 से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। ये पंचायतें अलग-अलग विकास खंडों के अंतर्गत आती हैं और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रशासन, विकास योजनाओं और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करती हैं।

सरपंच को कौन सस्पेंड कर सकता है?

ग्राम पंचायत के सरपंच या प्रधान के खिलाफ शिकायत होने पर कार्रवाई करने का अधिकार जिला प्रशासन के पास होता है। आमतौर पर जांच के बाद जिलाधिकारी (DM) या राज्य सरकार के पंचायत विभाग द्वारा सरपंच को निलंबित किया जा सकता है। यदि किसी प्रकार की अनियमितता, भ्रष्टाचार या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है।

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