Exhibition : नुमाइश में पुलिस स्टॉल्स ने बढ़ाई सुरक्षा और जागरूकता

By Ajay Kumar Shukla | Updated: January 14, 2026 • 9:50 PM

हैदराबाद। हैदराबाद की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा मानी जाने वाली नुमाइश प्रदर्शनी (exhibition) में इस बार नगर पुलिस ने विशेष स्टॉल्स लगाकर नागरिकों को सुरक्षा और जागरूकता की जानकारी दी। इन स्टॉल्स का उद्घाटन नगर पुलिस कमिश्नर वी.सी. सज्जनर और अतिरिक्त डीजीपी चारु सिन्हा ने बुधवार को किया। नगर पुलिस कमिश्नर वी.सी. सज्जनर ने बताया कि नुमायिश सिर्फ़ प्रदर्शनी नहीं बल्कि हैदराबाद की पहचान का अहम हिस्सा है। 1938 में कुछ स्टॉल्स से शुरू हुई यह प्रदर्शनी अब देश की सबसे बड़ी औद्योगिक प्रदर्शनी (Industrial exhibition) बन चुकी है। 85 वर्षों से अधिक की इस परंपरा ने राष्ट्रीय एकता और विभिन्न संस्कृतियों के संगम का प्रतीक बनकर उभरी है।

सड़क सुरक्षा पर लोगों को देंगी मार्गदर्शन

उन्होंने बताया कि इन स्टॉल्स का उद्देश्य नागरिकों को पुलिस सेवाओं के प्रति जागरूक करना है। विशेष रूप से महिला सुरक्षा पर काम करने वाली ‘शी टीमें’, साइबर अपराधों से बचाव और सड़क सुरक्षा पर लोगों को मार्गदर्शन देंगी। सज्जनर ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को इन स्टॉल्स पर अवश्य लाएँ ताकि छोटी उम्र से ही उन्हें ट्रैफिक नियम और सड़क सुरक्षा का ज्ञान मिल सके। अतिरिक्त डीजीपी चारु सिन्हा ने कहा कि महिला सुरक्षा विंग, भरोसा और शी टीमें इन स्टॉल्स के माध्यम से महिलाओं को पूर्ण सुरक्षा का भरोसा देंगी। उन्होंने इसे नागरिकों को कानून और सुरक्षा नियमों की जानकारी देने के लिए एक उत्तम मंच बताया।

15 लाख रुपये का अनुदान चेक भी सौंपा

इस अवसर पर एग्ज़िबिशन सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने नगर पुलिस को 15 लाख रुपये का अनुदान चेक भी सौंपा। कार्यक्रम में जॉइंट सीपी (ट्रैफिक) डी. जोएल डेविस, डीसीपी राहुल हेगड़े, जी. चंद्रमोहन, वी. अरविंद बाबू, लावण्या नायक जादव सहित अन्य पुलिस अधिकारी और सोसाइटी के पदाधिकारी उपस्थित थे।

हैदराबाद की संस्कृति कैसी है?

मिली-जुली परंपराओं से बनी यह संस्कृति गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल मानी जाती है। यहां हिंदू, मुस्लिम और अन्य समुदायों के रीति-रिवाज, भाषा, पहनावा और खानपान में आपसी मेल दिखाई देता है, जिससे शहर का सामाजिक जीवन सौहार्दपूर्ण और रंगीन बनता है।

हैदराबाद की विशेषता क्या है?

निज़ामी विरासत, आधुनिक आईटी हब और पारंपरिक जीवनशैली का अनोखा संगम इसकी पहचान है। ऐतिहासिक इमारतें, विश्वप्रसिद्ध बिरयानी, बहुभाषी समाज और तेज़ी से विकसित होती तकनीकी अर्थव्यवस्था इसे अन्य महानगरों से अलग बनाती हैं।

हैदराबाद की सांस्कृतिक विरासत क्या है?

चारमीनार, गोलकोंडा किला, चौमहल्ला पैलेस और कुतुबशाही मकबरे इसकी विरासत के प्रमुख प्रतीक हैं। उर्दू साहित्य, दक्खनी भाषा, शास्त्रीय संगीत, नृत्य और पारंपरिक त्योहार इस शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाते हैं।

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