BC : संगठित संघर्ष से ही बीसी को राजनीतिक अधिकार मिलेगा- डॉ. राव

By Ajay Kumar Shukla | Updated: January 5, 2026 • 4:36 PM

हैदराबाद। तेलंगाना राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वकुलाभरणम कृष्ण मोहन राव (Dr. Vakulabharanam Krishna Mohan Rao) ने कहा है कि जनसंख्या में बहुसंख्यक होने के बावजूद पिछड़ा वर्ग (बीसी) को राजनीतिक सत्ता में उचित प्रतिनिधित्व न मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था की गंभीर कमी है। यह बात उन्होंने रविवार को हैदराबाद के सोमाजीगुडा प्रेस क्लब (Somajiguda Press Club) में बीसी जाति संगठनों के संयुक्त मंच द्वारा आयोजित बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कही। बैठक की अध्यक्षता संयुक्त मंच के अध्यक्ष कट्टम नरसिंह यादव ने की। डॉ. कृष्ण मोहन राव ने कहा कि बीसी को राजनीतिक अधिकार कोई दान नहीं है। यह केवल संगठित प्रयास और सामूहिक संघर्ष से ही संभव है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति व्यक्त किया आभार

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बीसी अपनी संख्यात्मक शक्ति को राजनीतिक निर्णय शक्ति में परिवर्तित नहीं करते हैं, तो वे व्यवस्था में हाशिये पर ही बने रहेंगे। उन्होंने जाति जनगणना कराने के निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया और इसे भविष्य में पिछड़ा वर्ग से संबंधित नीतिगत फैसलों के लिए मजबूत आधार तथा सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। डॉ. कृष्ण मोहन राव ने तेलंगाना राज्य सरकार से मांग की कि बीसी के खिलाफ हो रहे भेदभाव और अत्याचारों को रोकने के लिए पिछड़ा वर्ग के लिए अलग एट्रोसिटी एक्ट तुरंत लागू किया जाए।

सुरक्षा और संरक्षण के बिना सामाजिक न्याय संभव नहीं

उन्होंने कहा कि सुरक्षा और संरक्षण के बिना सामाजिक न्याय संभव नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में 42 प्रतिशत आरक्षण लागू किए बिना चुनाव कराना लोकतांत्रिक भावना के विरुद्ध बताते हुए कहा कि जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक प्रतिनिधित्व न देना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने जोर देकर कहा, सामाजिक लोकतंत्र मजबूत होगा तभी राजनीतिक लोकतंत्र टिकेगा। सामाजिक न्याय के बिना लोकतंत्र पूर्ण नहीं हो सकता।

बीसी समाज की एकता को और मजबूत करने का आह्वान

डॉ. कृष्ण मोहन राव ने फुले दंपति, पेरियार, नारायण गुरु, राम मनोहर लोहिया, कर्पूरी ठाकुर और डॉ. बी.आर. आंबेडकर द्वारा परिकल्पित सामाजिक समानता के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए बीसी समाज की एकता को और मजबूत करने का आह्वान किया। इस अवसर पर मोंडा मार्केट की कॉरपोरेटर कोंतम दीपीका, राज्य भाजपा मोर्चा अध्यक्ष आनंद गौड़, प्रमुख बीसी नेता निरंजन यादव, सिटी अध्यक्ष वेंकटेश गौड़, वाई.वी. श्रीधर और रमेश सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे। तेलंगाना के विभिन्न जिलों से बीसी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में भाग लिया।

वर्तमान पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष कौन हैं?

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के वर्तमान अध्यक्ष हंसराज गंगाराम आहीर हैं। यह आयोग केंद्र स्तर पर अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक मुद्दों पर काम करता है। संविधान के अनुच्छेद 338-बी के अंतर्गत गठित यह संस्था आरक्षण नीति, जाति सूची और ओबीसी समुदाय से संबंधित शिकायतों की समीक्षा करती है। आयोग सरकार को नीतिगत सुझाव भी देता है, जिससे पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा हो सके और उन्हें समान अवसर मिलें।

OBC में कुल कितनी जातियां हैं?

भारत में अन्य पिछड़ा वर्ग की केंद्रीय सूची में लगभग 2000 से अधिक जातियां शामिल हैं। इसके अलावा हर राज्य की अपनी अलग ओबीसी सूची होती है, जिनमें शामिल जातियों की संख्या अलग-अलग हो सकती है। समय-समय पर सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति के आधार पर नई जातियों को सूची में जोड़ा जाता है या हटाया जाता है। यह प्रक्रिया आयोग की सिफारिशों और सरकारी निर्णयों पर निर्भर करती है।

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की नियुक्ति कौन करता है?

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा की जाती है। सामान्य रूप से यह नियुक्ति मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह पर होती है, जिसे राज्यपाल द्वारा औपचारिक रूप से मंजूरी दी जाती है। यह आयोग राज्य स्तर पर पिछड़े वर्गों से संबंधित मामलों, शिकायतों और आरक्षण नीति की समीक्षा करता है तथा राज्य सरकार को आवश्यक सुझाव देता है।

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