Tirupati : वोंटिमिट्टा ब्रह्मोत्सव की तैयारियों में तेजी

By Ajay Kumar Shukla | Updated: February 20, 2026 • 8:05 AM

जेईओ ने निरीक्षण कर दिए निर्देश

तिरुपति। श्री कोदंडरामस्वामी मंदिर (Sri Kodandaramaswamy Temple) में वार्षिक ब्रह्मोत्सवों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए टीटीडी के संयुक्त कार्यकारी अधिकारी वीराब्रह्मम ने अधिकारियों को फेस्टिवल से पहले कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया। यह महोत्सव 27 मार्च से 5 अप्रैल तक आयोजित होगा। अनकुरार्पण 26 मार्च को होगा और ध्वजारोहन 27 मार्च को। दिव्य श्री सीता-राम कल्याणम 1 अप्रैल को संपन्न होगा। गुरुवार को समीक्षा बैठक में, जेईओ ने अस्थायी रसोई, मंदिर और यज्ञशाला में मरम्मत कार्य, कतार व्यवस्थाएँ, शरण स्थल, साइनबोर्ड और इंजीनियरिंग कार्य समय पर पूर्ण करने पर जोर दिया। उन्होंने श्रीवारी सेवकों (Srivari Sevaks) की तैनाती और भक्तों के लिए अन्नप्राशन व्यवस्था समेत बैठने की सुविधाएँ सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

जेईओ ने किया काउंटरों का निरीक्षण

जेईओ ने फोटो प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल, कल्याण वेदिका विकास कार्य और तिलांब्रालु व अन्नप्राशन वितरण काउंटरों का निरीक्षण किया। पानी की व्यवस्था और मंदिर से कल्याण वेदिका मार्ग की सजावट व लैंडस्केपिंग सुधारने के निर्देश भी दिए गए। माडा स्ट्रीट्स की मरम्मत, उत्सव माहौल के लिए रोशनी और सजावट, चिकित्सा और सुरक्षा व्यवस्थाओं, वाहना सेवाओं के लिए एलईडी स्क्रीन और कवि सम्मेलन सहित सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन विशेष ध्यान में रखा गया। गर्मी में राहत हेतु छाछ और पेयजल काउंटरों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। टीटीडी के विभागों को डिप्युटेशन पर तैनात किया जाएगा, जबकि प्रचार रथ आसपास के गांवों में महोत्सव की जानकारी देंगे। जनसंपर्क विभाग सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार करेगा।

तिरुपति का इतिहास क्या है?

Tirupati प्राचीन काल से धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है। यहां स्थित Tirumala Venkateswara Temple को लगभग 2000 वर्ष पुराना माना जाता है। यह मंदिर भगवान Venkateswara को समर्पित है, जिन्हें विष्णु का अवतार माना जाता है। पल्लव, चोल और विजयनगर शासकों ने मंदिर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। समय के साथ यह दक्षिण भारत का प्रमुख तीर्थ स्थल बन गया।

तिरुपति में 300 रुपये के दर्शन करने में कितने घंटे लगेंगे?

300 रुपये का विशेष प्रवेश दर्शन सामान्यतः “शीघ्र दर्शन” श्रेणी में आता है। इसमें प्रतीक्षा समय भीड़ पर निर्भर करता है। सामान्य दिनों में 2 से 4 घंटे लग सकते हैं, जबकि त्योहारों या छुट्टियों में 5 से 8 घंटे तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। व्यवस्था का संचालन Tirumala Tirupati Devasthanams द्वारा किया जाता है, जो भीड़ के अनुसार समय प्रबंधन करता है।

तिरुपति मंदिर का रहस्य क्या है?

मंदिर से जुड़े कई धार्मिक विश्वास प्रचलित हैं। कहा जाता है कि भगवान की मूर्ति पर लगाए गए बाल कभी उलझते नहीं हैं और मूर्ति का तापमान सामान्य से अलग महसूस होता है। गर्भगृह में दीपक सदियों से निरंतर जलता आ रहा है, ऐसा माना जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से इन बातों के प्रमाण सीमित हैं, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए ये आस्था और चमत्कार का प्रतीक हैं।

तिरुपति इतना प्रसिद्ध क्यों है?

यह स्थान भारत के सबसे समृद्ध और अधिक दर्शनार्थियों वाले मंदिरों में से एक माना जाता है। प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। धार्मिक महत्व, सुव्यवस्थित प्रबंधन, ऐतिहासिक विरासत और दान की परंपरा इसे विशेष बनाती है। यहां मिलने वाला प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद भी आकर्षण का केंद्र है। आस्था, परंपरा और भव्यता का अनोखा संगम इसे विश्वभर में पहचान दिलाता है।

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