हैदराबाद। हैदराबाद पुलिस आयुक्त वी.सी. सज्जनार (V.C. Sajjanar) के निर्देशन में कार्यरत शी टीम्स ने महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत दो उत्पीड़न मामलों में आरोपियों को सजा दिलाने में सफलता प्राप्त की है। शी टीम्स को व्हाट्सएप, प्रत्यक्ष शिकायतों और सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए दोनों मामलों में दोष सिद्ध कराया गया। आरोपियों द्वारा महिलाओं को बार-बार फोन कॉल, संदेश और सोशल मीडिया के जरिए परेशान किया जा रहा था, जिससे पीड़िताएं मानसिक तनाव (Mental Stress) का सामना कर रही थीं। पहले मामले में करीमनगर निवासी 30 वर्षीय चिंथालापल्ली नवीन रेड्डी को एक परिचित महिला को लगातार फोन कॉल, संदेश और ब्लैकमेल कर परेशान करने का दोषी पाया गया।
शी टीम्स की कार्रवाई, दोनों आरोपियों को दो दिन की साधारण कैद
शी टीम्स द्वारा चेतावनी दिए जाने के बावजूद आरोपी अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 292 तथा हैदराबाद सिटी पुलिस अधिनियम की धारा 70(सी) के तहत मामला दर्ज किया गया। दूसरे मामले में लंगरहाउस निवासी 28 वर्षीय गडपा नरेश को अज्ञात महिलाओं को फोन कॉल तथा इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया माध्यमों से परेशान करने का दोषी पाया गया। आरोपी महिलाओं को लगातार अवांछित संदेश भेजकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। उसके खिलाफ भी भारतीय न्याय संहिता की धारा 292 और हैदराबाद सिटी पुलिस अधिनियम की धारा 70(सी) के तहत मामला दर्ज किया गया।
11वें विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में किया गया पेश
दोनों आरोपियों को नामपल्ली स्थित 11वें विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में पेश किया गया, जहां अदालत ने दोनों को दो-दो दिन की साधारण कारावास तथा 1050 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। शहर की शी टीम्स ने महिलाओं और युवतियों से अपील की है कि ऑनलाइन उत्पीड़न, पीछा करना, ब्लैकमेलिंग या अश्लील संदेशों से संबंधित किसी भी घटना की तुरंत शिकायत करें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को किसी भी रूप में परेशान करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शी टीम्स ने लोगों को फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल से सावधान रहने, व्यक्तिगत जानकारी साझा करने में सतर्कता बरतने तथा अपने ऑनलाइन खातों की सुरक्षा मजबूत रखने की सलाह दी है। किसी भी प्रकार की शिकायत के लिए महिलाएं पुलिस हेल्पलाइन नंबर 100 या व्हाट्सएप नंबर 9490616555 पर संपर्क कर सकती हैं।
महिला उत्पीड़न में कौन-कौन सी धारा लगती है?
ऐसे मामलों में भारतीय कानून के तहत अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार विभिन्न धाराएं लगाई जा सकती हैं। इसमें शारीरिक हिंसा, दहेज उत्पीड़न, छेड़छाड़, घरेलू हिंसा, धमकी या यौन उत्पीड़न से संबंधित प्रावधान शामिल हो सकते हैं। पुलिस शिकायत और जांच के आधार पर उचित धाराएं तय करती है। हर मामले की गंभीरता और उपलब्ध सबूतों के अनुसार कानूनी कार्रवाई अलग हो सकती है। महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए कानून में कई विशेष प्रावधान बनाए गए हैं।
महिला उत्पीड़न के लिए शिकायत कैसे करें?
पीड़ित महिला नजदीकी पुलिस स्टेशन, महिला हेल्पलाइन या महिला आयोग में शिकायत दर्ज करा सकती है। कई राज्यों में ऑनलाइन शिकायत और हेल्पलाइन की सुविधा भी उपलब्ध है। शिकायत में घटना की पूरी जानकारी, तारीख, स्थान और संबंधित व्यक्ति का विवरण देना जरूरी माना जाता है। जरूरत पड़ने पर मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूत भी उपयोगी हो सकते हैं। गंभीर मामलों में पुलिस जांच शुरू कर कानूनी कार्रवाई करती है। महिलाओं की सहायता के लिए विभिन्न सरकारी और सामाजिक संस्थाएं भी कार्य करती हैं।
महिला उत्पीड़न से क्या तात्पर्य है?
महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार का मानसिक, शारीरिक, आर्थिक या यौन दुर्व्यवहार महिला उत्पीड़न कहलाता है। इसमें धमकी देना, हिंसा करना, अपमानित करना, दहेज के लिए प्रताड़ित करना या कार्यस्थल पर अनुचित व्यवहार शामिल हो सकता है। यह सामाजिक और कानूनी रूप से गंभीर समस्या मानी जाती है। महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा की रक्षा के लिए देश में कई कानून बनाए गए हैं। जागरूकता और कानूनी सहायता के माध्यम से ऐसे मामलों को रोकने का प्रयास किया जाता है।
महिला उत्पीड़न में कितने साल की सजा होती है?
सजा अपराध की प्रकृति और गंभीरता पर निर्भर करती है। अलग-अलग मामलों में जेल, जुर्माना या दोनों दंड दिए जा सकते हैं। कुछ गंभीर अपराधों में कई वर्षों तक की सजा का प्रावधान होता है। अदालत सबूत, परिस्थितियों और आरोपी की भूमिका के आधार पर निर्णय सुनाती है। महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए कानून में कड़े प्रावधान बनाए गए हैं। शिकायत मिलने पर पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाती है।
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