प्राथमिक उपचार केंद्रों के अभाव पर सांसद वामसी की चिंता
तिरुपति। तिरुमला में श्रद्धालुओं (devotees) की सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सांसद वामसी ने आरोप लगाया कि पैदल मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में प्राथमिक उपचार (फर्स्ट-एड) केंद्रों की अनुपस्थिति के कारण आपात स्थितियों में श्रद्धालु असुरक्षित बने हुए हैं। उन्होंने सीढ़ियों के पास बसों और कारों की आवाजाही के बीच श्रद्धालुओं के व्यस्त सड़कों को पार करने की खतरनाक (Dangerous) स्थिति की ओर भी ध्यान दिलाया। सांसद ने सवाल उठाया कि क्या श्रद्धालुओं की सुरक्षा को “हवा के हवाले छोड़ दिया गया है।”
वामसी ने मंत्री लोकेश को दी चुनौती
तत्काल कदम उठाने की मांग करते हुए वामसी ने मंत्री लोकेश को चुनौती दी कि वे स्वयं सात पहाड़ियों के पैदल मार्ग पर चलकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर उच्चतम स्तर पर हस्तक्षेप कर सुविधाओं में सुधार सुनिश्चित करने की भी अपील की।उल्लेखनीय है कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है। यह बयान उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण की आलोचना और टीटीडी के कार्यकारी अधिकारी श्यामला राव को हाल ही में हटाए जाने की पृष्ठभूमि में सामने आया है।
तिरुमला का मतलब क्या होता है?
संस्कृत और तेलुगु मूल के अनुसार यह नाम पवित्र और शुभ पर्वत क्षेत्र को दर्शाता है। “तिरु” का अर्थ पवित्र या श्रीमान और “मला” का अर्थ पहाड़ माना जाता है, यानी पवित्र पहाड़ियों का स्थान।
तिरुमाला में क्या है?
आंध्र प्रदेश में स्थित यह स्थान भगवान वेंकटेश्वर (बालाजी) के विश्वप्रसिद्ध मंदिर के लिए जाना जाता है। यहाँ मंदिर, पवित्र कुंड, धर्मशालाएँ, तीर्थ स्थल और प्राकृतिक पहाड़ियाँ मौजूद हैं, जहाँ हर साल करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
तिरुमाला के 7 बिंदु क्या हैं?
सप्तगिरी यानी सात पवित्र पहाड़ियाँ तिरुमाला की पहचान हैं। इनके नाम हैं—
शेषाद्रि, नीलाद्रि, गरुड़ाद्रि, अंजनाद्रि, वृषभाद्रि, नारायणाद्रि और वेंकटाद्रि। इन्हें भगवान वेंकटेश्वर का दिव्य स्वरूप माना जाता है।
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