73 प्रकार की अवैध दवाएं जब्त
हैदराबाद। तेलंगाना राज्य औषधि नियंत्रण प्रशासन (DCA) ने करीमनगर ज़िले के गंगाधरा मंडल स्थित गट्टुबुतकुर गांव में एक झोलाछाप (अयोग्य) चिकित्सक के क्लिनिक पर छापा मारकर बिना लाइसेंस बेची जा रही दवाओं का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान लगभग 27,879 रुपये मूल्य की दवाएं जब्त की गईं। महानिदेशक, ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन, तेलंगाना , शहनवाज़ क़ासिम ने बताया कि मिली विश्वसनीय सूचना के आधार पर डीसीए अधिकारियों ने हिमा बिंदु फर्स्ट एड सेंटर पर छापा मारा। यह क्लिनिक (Clinic) वेमुला साई कृष्णा नामक व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा था, जो बिना किसी वैध चिकित्सकीय योग्यता के इलाज कर रहा था।
बिना वैध ड्रग लाइसेंस के क्लिनिक में रखी गई थीं दवाएं
छापे के दौरान अधिकारियों ने 73 प्रकार की दवाएं बरामद कीं, जिनमें 19 प्रकार के फिजिशियन सैंपल, एंटीबायोटिक्स, स्टेरॉयड, दर्द निवारक, उच्च रक्तचाप और अल्सर की दवाएं शामिल हैं। ये सभी दवाएं बिना वैध ड्रग लाइसेंस के क्लिनिक में रखी गई थीं। अधिकारियों को क्लिनिक से उच्च श्रेणी की एंटीबायोटिक्स जैसे सेफोटैक्सिम, सेफपोडॉक्सिम और सेफिक्सिम भी मिलीं। डीसीए ने चेतावनी दी कि अयोग्य व्यक्तियों द्वारा एंटीबायोटिक्स की अनियंत्रित बिक्री से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा, क्लिनिक में स्टेरॉयड दवाओं की मौजूदगी भी पाई गई। अधिकारियों के अनुसार, स्टेरॉयड का दुरुपयोग रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, हार्मोन असंतुलन, हड्डियों व मांसपेशियों की कमजोरी, हृदय रोग तथा मानसिक दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है।
दवाओं का भंडारण और बिक्री बिना वैध लाइसेंस के करना अपराध
यह कार्रवाई एस. उमरानी, ड्रग्स इंस्पेक्टर, करीमनगर द्वारा के. दास, सहायक निदेशक, करीमनगर की निगरानी में की गई। दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और मामले की आगे जांच जारी है। दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। औषधि नियंत्रण प्रशासन ने थोक विक्रेताओं और दवा आपूर्तिकर्ताओं को सख्त चेतावनी दी है कि यदि वे झोलाछाप डॉक्टरों, अयोग्य व्यक्तियों या बिना लाइसेंस वाली दुकानों को दवाएं सप्लाई करते पाए गए, तो उनके खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। डीसीए ने स्पष्ट किया कि दवाओं का भंडारण और बिक्री बिना वैध लाइसेंस के करना अपराध है, जिसके लिए पांच वर्ष तक की कैद का प्रावधान है। सभी थोक विक्रेताओं को निर्देश दिया गया है कि वे दवाओं की आपूर्ति से पहले संबंधित प्रतिष्ठान के वैध ड्रग लाइसेंस की जांच करें और उसका रिकॉर्ड रखें।
झोलाछाप डॉक्टर क्या होता है?
सामान्य तौर पर झोलाछाप डॉक्टर उसे कहा जाता है, जो बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री या लाइसेंस के इलाज करता है। ऐसे लोग गांवों या कस्बों में अवैध रूप से दवाएं देते, इंजेक्शन लगाते और इलाज करते हैं। इनसे मरीजों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है, इसलिए कानून इन्हें अवैध मानता है और इनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है।
झोलाछाप डॉक्टर पर कौन सी धारा लगती है?
कानूनी रूप से झोलाछाप डॉक्टर पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 304A (लापरवाही से मौत) और मेडिकल काउंसिल एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा राज्य के क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट कानून के तहत भी सजा का प्रावधान है। मरीज को नुकसान पहुंचने पर सजा और जुर्माना दोनों हो सकते हैं।
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