एससीआर के रेलवे बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने के प्रयास
हैदराबाद। दक्षिण मध्य रेलवे (SCR) का रेलवे नेटवर्क दक्षिण और उत्तरी भारत को जोड़ते हुए दक्षिण भारत के लिए एक मुख्य मार्ग के रूप में कार्य करता है। गूदूरु से बल्हर्षा तक का रेल मार्ग, माल परिवहन और कोचिंग ट्रेनों दोनों के लिए निरंतर प्रवाह के साथ एक ग्रैंड ट्रंक मार्ग के रूप में काम करता है। काजीपेट से सिकंदराबाद होते हुए वाड़ी तक जाने वाला रेल मार्ग भी एक उच्च घनत्व वाला नेटवर्क माना जाता है। इस ज़ोन का प्रमुख रेलवे नेटवर्क अत्यधिक व्यस्त है। इस व्यस्तता को कम करने और रेल आवागमन को सुगम बनाने के लिए, 2025-26 वित्तीय वर्ष में बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया गया। अनुसार, ज़ोन में कुल 194.57 किलोमीटर ट्रैक (Track) जोड़ने का काम किया गया। इसमें नए रेल मार्ग, रेलवे लाइनों का डबलिंग और ट्रिपलिंग शामिल हैं।
तीसरी लाइन का काम लगभग पूरा हो गया
नए रेल मार्ग में मल्लावरम –कनिगिरी: 35.93 किमी, डबलिंग – कुल 78.768 किमी, पण्यम – नंद्याल: 13.488 किमी, बासरा – नविपेट: 17 किमी, काजीपेट में बायपास लाइन: 21.46 किमी, वाड़ी में बायपास लाइन: 22.70 किमी, तांडूर में वाई कनेक्शन: 1.95 किमी, पेदापल्ली में बी बाईपास लाइन 2.17 किमी, ट्रिपलिंग – कुल 79.872 किमी, बल्हर्षा – माणिकघेर: 6.91 किमी, रिचनी रोड – बेल्लमपल्ली 9.636 किमी, बेल्लमपल्ली – मंड़मर्री 7.52 किमी, मोटुमर्री – मधीर: 5.80 किमी, महबूबाबाद – नेक्कोंडा: 30.416 किमी, खम्मम – डोर्नकल 19.59 किमी शामिल है। इसी प्रकार 2025-26 में कुल 325 किलोमीटर ट्रैक का विद्युतीकरण पूरा किया गया। जोन की निरंतर मेहनत के परिणामस्वरूप, गूदूरु से विजयवाड़ा और काजीपेट होकर बल्हर्षा तक विस्तारित प्रमुख ‘ग्रैंड ट्रंक मार्ग’ में तीसरी लाइन का काम लगभग पूरा हो गया है। लगभग 700 किलोमीटर का काम पूर्ण हो चुका है, केवल पेदावड़्लपुडी – कृष्णा कैनाल (7 किमी), डोर्नकल – महबूबाबाद (20 किमी), और सिरपुर कागज़नगर – आसिफाबाद (11 किमी) के छोटे हिस्से शेष हैं।
परिवहन को सुगम बनाता है यात्री और माल
यह दक्षिण से उत्तर की ओर यात्री और माल परिवहन को सुगम बनाता है। इसके अलावा, इस ज़ोन के प्रमुख जंक्शन काजीपेट, वाड़ी और पेदापल्ली में बायपास लाइन का निर्माण भी रेल आवागमन को बिना किसी रुकावट के जारी रखने में सहायक है। टांडूर में बनाए गए ‘वाई’ कनेक्शन से तांडूर क्षेत्र से प्रारंभ होने वाले माल परिवहन और मुम्बई मार्ग पर चलने वाली यात्री ट्रेन सेवाओं में सुधार हुआ है। मल्लावरम और कनिगिरी के बीच नए रेल मार्ग की स्थापना से आसपास के दूरदराज़ गांवों को रेलवे नेटवर्क से जोड़ा गया है और उनके विकास को बढ़ावा मिलेगा। बुनियादी ढांचे के विकास में इसी गति को बनाए रखने के लिए, पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में वर्तमान वित्तीय वर्ष (2026-27) में बजट आवंटन भी अधिक किया गया है।
13,026 करोड़ रुपए आवंटित किए गए
पिछले वित्तीय वर्ष में 11,012 करोड़ रुपए के मूलधन व्यय (सीएपीईएक्स ) की तुलना में इस वित्तीय वर्ष में 13,026 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जिसमें नई लाइनों के लिए 1,315 करोड़ रुपए , डबलिंग के लिए 5,083 करोड़, ट्रैक नवीनीकरण के लिए 1,908 करोड़, यातायात सुविधाओं के लिए 403 करोड़ और सड़क सुरक्षा कार्यों के लिए 683 करोड़ रुपए शामिल हैं। दक्षिण मध्य रेलवे के महाप्रबंधक संजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि बुनियादी ढांचे के विकास में विशेष रूप से निर्माण, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल, सिग्नल और टेलीकॉम और ऑपरेटिंग विभागों में ज़ोन अधिकारी और कर्मचारी सामूहिक प्रयासों के लिए सराहनीय रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में बढ़ाया गया बजट पूरे ज़ोन में रेलवे बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने में मदद करेगा। उन्होंने भविष्य में भी इसी उत्साह को बनाए रखने का निर्देश दिया।
ट्रेन ड्राइवर की 1 महीने की सैलरी कितनी होती है?
भारत में लोको पायलट की सैलरी पद और अनुभव के अनुसार बदलती है। शुरुआती स्तर पर लगभग 30,000 से 40,000 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। अनुभव बढ़ने पर यह 60,000 से 80,000 रुपये या उससे अधिक भी हो सकती है। इसमें बेसिक पे के साथ ग्रेड पे, डीए, एचआरए और अन्य भत्ते शामिल होते हैं। लंबी दूरी और रात की ड्यूटी के लिए अतिरिक्त भत्ता भी दिया जाता है, जिससे कुल आय बढ़ जाती है।
क्या 10 वीं पास रेलवे नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं?
हाँ, 10वीं पास उम्मीदवार रेलवे में कई पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। भारतीय रेलवे द्वारा ग्रुप D, ट्रैक मेंटेनर, हेल्पर और विभिन्न तकनीकी सहायकों के पदों पर भर्ती निकाली जाती है। कुछ पदों के लिए आईटीआई योग्यता भी जरूरी होती है। उम्मीदवारों को शारीरिक परीक्षा, लिखित परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन से गुजरना पड़ता है। नियमित रूप से रेलवे भर्ती बोर्ड की अधिसूचनाएं जारी होती रहती हैं।
रेल के मालिक कौन थे?
भारत में रेल प्रणाली की शुरुआत अंग्रेजों के शासनकाल में हुई थी। उस समय रेल नेटवर्क पर नियंत्रण ब्रिटिश सरकार और निजी कंपनियों के पास था। बाद में धीरे-धीरे सभी रेलवे लाइनों का राष्ट्रीयकरण किया गया। आज रेल व्यवस्था पूरी तरह से भारतीय रेलवे के अंतर्गत आती है, जो भारत सरकार के रेल मंत्रालय द्वारा संचालित होती है। इसलिए वर्तमान में इसका मालिकाना हक सरकार के पास है।
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