हैदराबाद। तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन. रामचंदर राव (N. Ramchander Rao) ने खम्मम जिले में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और संगठनात्मक मजबूती पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान एक विशेष प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसमें बीजेपी के विचारधारात्मक आधार से लेकर विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक (Political) पार्टी बनने तक की प्रेरणादायक यात्रा को प्रदर्शित किया गया।
दृष्टिकोण और योगदान को भी विस्तार से दर्शाया गया
प्रदर्शनी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन, उनके दृष्टिकोण और योगदान को भी विस्तार से दर्शाया गया। उनके ‘अंत्योदय’ और ‘एकात्म मानववाद’ के सिद्धांतों को भाजपा की राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा की प्रतिबद्धता का मार्गदर्शक बताया गया। नेताओं ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय के विचार आज भी संगठन को गरीब और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए प्रेरित करते हैं। यह कार्यक्रम खम्मम में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
खम्मम क्यों प्रसिद्ध है?
अपने ऐतिहासिक किले, प्राचीन मंदिरों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। यहां किन्नेरासानी वन्यजीव अभयारण्य है जो लगभग 635 वर्ग किमी में फैला है और बाघ, तेंदुआ, अजगर जैसे जीवों का घर है। यहां जमालपुरम मंदिर है जिसे तेलंगाना का तिरुपति कहा जाता है और यह हजारों वर्ष पुराना स्वयंभू मंदिर माना जाता है। इसके अलावा खम्मम कोयला और वन संपदा के लिए भी जाना जाता है।
खम्मम का प्रसिद्ध भोजन क्या है?
तेलंगाना राज्य में होने के कारण यहां का खानपान मुख्यतः तेलुगु व्यंजन परंपरा पर आधारित है। यहां पेसारट्टू (मूंग दाल डोसा), गोंगुरा पचड़ी (अम्बाड़ी की चटनी), नाती कोडी करी (देसी मुर्गा), उलवा चारू (घोड़े चने का रसम) और चिंतापंडु पुलुसु (इमली की सब्जी) बेहद लोकप्रिय हैं। यहां का खाना तीखा और मसालेदार होता है और चावल मुख्य आहार है।
खम्मम किस जिले में है?
तेलंगाना राज्य के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित खम्मम जिले का मुख्यालय है। यह स्वयं एक जिला है। खम्मम जिले का क्षेत्रफल 4,360 वर्ग किमी है और 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या लगभग 13,89,566 है। इसका इतिहास 200 वर्ष से भी पुराना है जब यहां मुसुनुरि राजवंश का शासन था।
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