बालिका की सुरक्षा के लिए नायक बना युवा सम्मानित
हैदराबाद। हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वी.सी. सज्जनार (V.C. Sajjanar) ने महमद फिरोज नामक एक युवा को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया, जिसने अपनी तत्परता और साहस के कारण आठ वर्षीय बालिका को गंभीर संकट से बचाया। इसके साथ ही उन्हें नगद इनाम भी प्रदान किया गया। घटना 1 अप्रैल को अबिड्स इलाके में हुई। स्कूल से घर लौट रही बालिका को मेहदीपट्टनम हिल्स कॉलोनी का ऑटो चालक सलीम बहाने से अपनी ऑटो में बैठा ले गया और गोलकुंडा के एक सुनसान स्थान पर अश्लील रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास किया। उसी समय मस्जिद से बाहर निकल रहे फिरोज ने ऑटो में बालिका के रोते हुए होने को देखा। संदेह होने पर उन्होंने तुरंत ऑटो (Auto) को रोककर बालिका से बात की।
फिरोज ने तुरंत ऑटो चालक को रोका
बालिका ने बताया कि ड्राइवर उसके साथ अश्लील व्यवहार कर रहा है। फिरोज ने तुरंत ऑटो चालक को रोका, जिसके बाद आरोपी बालिका को वहीं छोड़कर फरार हो गया। फिरोज ने बालिका के आईडी कार्ड पर मौजूद फ़ोन नंबर के माध्यम से उसके पिता को सूचना दी। इसी बीच स्कूल के पास बालिका के माता-पिता चिंता में थे। घटना की जानकारी मिलने पर अबिड्स पीएस के ब्लू कोट्स कांस्टेबल साईकृष्ण और केदार सिंह तुरंत गोलकुंडा पहुंचे और बालिका को सुरक्षित रूप से माता-पिता के हवाले किया। पुलिस ने आरोपी सलीम को 2 अप्रैल को गिरफ्तार किया और ऑटो को जब्त कर रिमांड पर भेजा।

संकट के समय जिम्मेदार नागरिक का योगदान समाज के लिए प्रेरणा
सीपी वी.सी. सज्जनार ने कहा कि संकट के समय जिम्मेदार नागरिक का योगदान समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने फिरोज की तत्परता और साहस की सराहना करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को ऐसा साहस और समयस्फूर्ति अपनानी चाहिए। उन्होंने ब्लू कोट्स कांस्टेबल साईकृष्ण और केदार सिंह को भी विशेष रूप से उनके कुशल और जिम्मेदार कार्य के लिए अभिनंदन किया। सम्मान समारोह में अतिरिक्त सीपी तफसीर इकबाल, जॉइंट सीपी एन. श्वेत, डीसीपी के. शिल्पावली, एस. श्रीनिवास, आईपीएस, लावण्या नायक जादव, एएसपी अबिड्स पी. प्रवीन कुमार समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बच्चों की रक्षा कौन होती है?
आमतौर पर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सबसे पहले उनके माता-पिता और परिवार की होती है। इसके अलावा सरकार और कानून भी बच्चों की रक्षा के लिए काम करते हैं, जैसे बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत बच्चों के अधिकार सुरक्षित किए जाते हैं। स्कूल, समाज और विभिन्न संस्थाएं भी बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
बच्चे पर पहला अधिकार किसका होता है?
कानूनी और सामाजिक रूप से बच्चे पर पहला अधिकार उसके माता-पिता का माना जाता है। माता-पिता बच्चे की देखभाल, शिक्षा और पालन-पोषण के लिए जिम्मेदार होते हैं। हालांकि, यह अधिकार बच्चे के हित में होना चाहिए। यदि माता-पिता बच्चे की सही देखभाल नहीं करते, तो कानून हस्तक्षेप कर सकता है और बच्चे के हित को प्राथमिकता दी जाती है।
10 महिलाओं के अधिकार क्या हैं?
महिलाओं को कई महत्वपूर्ण अधिकार प्राप्त हैं, जो समानता और सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। जैसे—शिक्षा का अधिकार, समान वेतन का अधिकार, संपत्ति का अधिकार, विवाह और तलाक का अधिकार, सुरक्षा का अधिकार, काम करने का अधिकार, मातृत्व लाभ का अधिकार, सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार, कानूनी सहायता का अधिकार और मतदान का अधिकार। ये अधिकार महिलाओं को समाज में बराबरी और सम्मान दिलाने के लिए बनाए गए हैं।
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