हैदराबाद। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने नामपल्ली स्थित भाजपा (BJP) राज्य कार्यालय में मीडिया से बातचीत में कहा कि केरल में चुनाव प्रचार के दौरान तेलंगाना मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा दिए गए दावे पूरी तरह गलत हैं। किशन रेड्डी ने आरोप लगाया कि तेलंगाना में कांग्रेस द्वारा लागू की गई छह गारंटियों में से कोई भी योजना पूरी तरह सफल नहीं हुई। उन्होंने कहा, ”महिलाओं को महीने 2,500 रुपये, पेंशनधारियों को 2,000–4,000 रुपये, दिव्यांगों को 3,000–6,000 रुपये, दलित परिवारों को 12 लाख रुपये देने के वादे पूरे नहीं हुए।
इसे लागू किया गया दिखाना जनता के साथ धोखा है।” केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि कांग्रेस केवल मामूली मामलों पर ध्यान दे रही है, जबकि कालेश्वरम परियोजना घोटाले की पूरी जांच सीबीआई द्वारा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले कांग्रेस ने भद्राचलम (Bhadrachalam) मंझम क्षेत्र को अनैतिक रूप से आंध्र प्रदेश को सौंपा था और इसमें भाजपा या केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। किशन रेड्डी ने जनता से चेतावनी दी कि कांग्रेस के प्रचार पर विश्वास न करें और केवल जिम्मेदार और सक्षम शासन पर ध्यान दें।
केरल में सबसे ज्यादा फेमस क्या है?
अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बैकवॉटर, हरे-भरे नारियल के पेड़ों और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यहां के अलेप्पी बैकवॉटर, मुन्नार की चाय बागान, आयुर्वेदिक उपचार और कथकली नृत्य विश्वभर में मशहूर हैं। इसके अलावा स्वादिष्ट समुद्री भोजन और मसालों का उपयोग भी खास पहचान है। पर्यटन, संस्कृति और प्रकृति का सुंदर मिश्रण यहां देखने को मिलता है।
केरल घूमने में कितना खर्चा आएगा?
घूमने का खर्च आपकी यात्रा शैली पर निर्भर करता है। बजट ट्रिप में लगभग 8,000 से 15,000 रुपये में 3–4 दिन का खर्च हो सकता है, जिसमें साधारण होटल और लोकल यात्रा शामिल होती है। मध्यम बजट में 20,000 से 40,000 रुपये लग सकते हैं। यदि आप हाउसबोट, रिसॉर्ट और प्रीमियम सुविधाएं लेते हैं, तो खर्च 50,000 रुपये या उससे अधिक भी हो सकता है। सीजन, यात्रा दूरी और रहने के विकल्प के अनुसार खर्च बदलता रहता है।
केरल में कौन सा धर्म है?
यहां कोई एक धर्म नहीं, बल्कि विभिन्न धर्मों के लोग रहते हैं। हिंदू धर्म के अनुयायी सबसे अधिक हैं, इसके बाद मुस्लिम और ईसाई समुदाय की बड़ी संख्या है। केरल धार्मिक विविधता और सहिष्णुता के लिए जाना जाता है। यहां मंदिर, मस्जिद और चर्च साथ-साथ देखने को मिलते हैं, जो सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक हैं।
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