हैदराबाद। पंचायत राज मंत्री सीतक्का (Sitakka) ने महिला कल्याण के मुद्दे पर राज्य सरकार के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर बीआरएस विधायक केटी रामाराव पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि केटीआर सरकार के खिलाफ निराधार और बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। मंगलवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सीतक्का ने कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य एक करोड़ महिलाओं को लखपति (Millionaire) बनाना है।
कांग्रेस सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है और विपक्ष से अपील की कि वह एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभाते हुए इस प्रयास में सहयोग करे। सीतक्का ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि अब तक राज्य में महिला स्वयं सहायता समूहों को 57,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा शुरू की जा रही हर योजना का मजाक उड़ाना विपक्ष के लिए उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया, ‘बीते दस वर्षों तक सत्ता में रही बीआरएस वह काम क्यों नहीं कर पाई, जो हम वर्तमान में कर रहे हैं?’
महिला कल्याण से आप क्या समझते हैं?
सामाजिक दृष्टि से महिलाओं के जीवन स्तर को सुधारने के लिए किए जाने वाले प्रयासों को महिला कल्याण कहा जाता है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सुरक्षा और समान अधिकार जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देना शामिल होता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें समाज में बराबरी का दर्जा दिलाना है। विभिन्न सरकारी योजनाओं और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
महिला कल्याण और प्रभाव कब से शुरू हुआ था?
ऐतिहासिक रूप से महिलाओं के कल्याण के प्रयास प्राचीन काल से ही विभिन्न रूपों में दिखाई देते हैं, लेकिन आधुनिक रूप में यह आंदोलन 19वीं और 20वीं सदी में तेजी से विकसित हुआ। भारत में स्वतंत्रता के बाद सरकार ने महिला शिक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों के लिए कई योजनाएं शुरू कीं, जिससे समाज में महिलाओं की स्थिति में सुधार आया और उनके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा।
स्त्री कल्याण क्या है?
व्यापक रूप में स्त्रियों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने वाली प्रक्रियाओं को स्त्री कल्याण कहा जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा के अवसर, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाकर उन्हें समाज में सम्मान और समान अवसर प्रदान किए जाते हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर और जागरूक नागरिक बन सकें।
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