हैदराबाद। पूर्व मंत्री व बीआरएस नेता जी. जगदीश रेड्डी (G. Jagadish Reddy) ने बीआरएस नेता चिंतलापति मधु की हत्या को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह एक “राजनीतिक रूप से प्रायोजित हत्या” है और इसके पीछे कांग्रेस नेताओं का हाथ हो सकता है। सूर्यापेट में मृतक को श्रद्धांजलि देने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए और पुलिस (Police) की भूमिका की जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा कांग्रेस सरकार के दौरान पुलिस थानों पर सत्ताधारी नेताओं का प्रभाव बढ़ गया है।
पूर्व मंत्री व बीआरएस नेता जी. जगदीश रेड्डी ने उठाए सवाल
जी. जगदीश रेड्डी ने कहा कि पहले मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के कार्यकाल में राज्य में शांति और मजबूत कानून व्यवस्था थी, लेकिन वर्तमान सरकार में “गुंडा राजनीति” हावी हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मृतक मधु को पहले से धमकियां मिल रही थीं और मामले की जांच को प्रभावित करने के लिए पब्लिक प्रॉसिक्यूटर में बदलाव किया गया। उन्होंने कहा कि मधु को झूठे बहाने से बुलाकर उनकी हत्या की गई। बीआरएस नेता ने यह भी घोषणा की कि पार्टी मृतक के परिवार की आर्थिक मदद करेगी और उनकी दो बेटियों की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाएगी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पुलिस के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा सकती है?
यदि किसी पुलिसकर्मी पर गलत व्यवहार, भ्रष्टाचार या अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप हो, तो संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, पुलिस शिकायत प्राधिकरण या मानवाधिकार आयोग में शिकायत की जा सकती है। गंभीर मामलों में न्यायालय का सहारा भी लिया जा सकता है। शिकायत लिखित रूप में, ऑनलाइन पोर्टल या हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज कराई जा सकती है। जांच के बाद विभागीय कार्रवाई या कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस को कौन सस्पेंड कर सकता है?
पुलिसकर्मी को निलंबित करने का अधिकार आमतौर पर उसके विभाग के वरिष्ठ अधिकारी या राज्य सरकार के पास होता है। यह कार्रवाई अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार, कर्तव्य में लापरवाही या गंभीर शिकायतों के मामलों में की जा सकती है। विभागीय जांच के दौरान निलंबन अस्थायी कदम के रूप में लिया जाता है। अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट और नियमों के अनुसार किया जाता है।
पुलिस बदतमीजी करे तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में शांत रहकर घटना की जानकारी नोट करना और संभव हो तो सबूत सुरक्षित रखना उपयोगी माना जाता है। संबंधित थाना प्रभारी, एसपी, डीजीपी कार्यालय या पुलिस शिकायत प्राधिकरण में शिकायत की जा सकती है। कई राज्यों में ऑनलाइन शिकायत पोर्टल और हेल्पलाइन भी उपलब्ध हैं। गंभीर मामलों में मानवाधिकार आयोग या अदालत से भी मदद ली जा सकती है। अपने अधिकारों की जानकारी रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :