हैदराबाद । महाशिवरात्रि (Mahashivratri) पर्व के अवसर पर तेलंगाना के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं (Devotees) की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। रविवार तड़के से ही श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचने लगे और वातावरण शिव नाम के जयघोष से गूंज उठा। दर्शन के बाद अनेक भक्त विशेष पूजन और अभिषेक कर रहे हैं। पर्व अत्यंत भव्यता के साथ मनाया जा रहा है।
मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं
तेलंगाना के राजन्ना सिरिसिल्ला जिले के वेमुलावाड़ा स्थित भीमेश्वर मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। भगवान शिव के दर्शन के लिए लगभग दो घंटे का प्रतीक्षा समय बताया गया है। वहां उपस्थित श्रद्धालुओं ने विशेष अनुष्ठानों में भी भाग लिया। इसके अतिरिक्त मंत्री पोन्नम प्रभाकर और सरकारी सचेतक आदि श्रीनिवास ने सरकार की ओर से देवता को रेशमी वस्त्र अर्पित किए। राज्य के विभिन्न शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय भीड़ देखी गई।
डिप्टी सीएम ने सीएम और मंत्रियों के नाम से विशेष प्रार्थनाएं की
उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क अपनी धर्मपत्नी नंदिनी के साथ रविवार को मादिरा स्थित श्री मृत्युंजय स्वामी मंदिर पहुंचे और राज्य की समृद्धि तथा सभी नागरिकों के स्वास्थ्य एवं दीर्घायु के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर वे देवी गंगा पार्वती के सान्निध्य में उपस्थित रहे। उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में विशेष अर्चना की, जिसमें मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी तथा राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों के नाम और गोत्र उच्चारित किए गए। दंपति ने सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए तथा सत्तारूढ़ प्रशासन पर ईश्वरीय कृपा बनाए रखने की कामना की। वायरा नदी के तट पर स्थित मृत्युंजय स्वामी मंदिर पहुंचने पर उपमुख्यमंत्री और उनकी पत्नी का मंदिर अधिकारियों तथा स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया।
महाशिवरात्रि व्रत के नियम क्या हैं?
महाशिवरात्रि व्रत हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण उपवास है। इसके कुछ मुख्य नियम और परंपराएँ इस प्रकार हैं:
- व्रत का उद्देश्य –
व्रत का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव की कृपा प्राप्त करना, पापों का नाश करना और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करना है। - पूजा और समय –
- व्रत सूर्योदय से प्रारंभ होता है और अगले दिन सूर्योदय तक रहता है।
- इस दिन विशेष रूप से रात्रि में शिवलिंग का अभिषेक और पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- भोजन का नियम –
- दिन भर अनाहार (कुछ न खाने) या केवल फल, दूध, या हल्का भोजन करने की परंपरा है।
- कुछ लोग पूरे दिन जल मात्र ग्रहण करते हैं।
- पूजा सामग्री –
- बेलपत्र, जल, दूध, घी, पुष्प और धूप दीप से शिवलिंग का पूजन किया जाता है।
- ध्यान और मंत्रोच्चारण (जैसे “ॐ नमः शिवाय”) का विशेष महत्व है।
- रात्रि जागरण (रातभर जागना) –
- महाशिवरात्रि की रात्रि जागरण करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है।
- भक्त जागरण करते हुए भजन-कीर्तन और मंत्र जाप करते हैं।
- सदाचार और संयम –
- व्रत के दिन सदाचार, अहिंसा, पवित्रता का पालन करना आवश्यक है।
- गुस्सा, झूठ, विवाद और अशुद्ध कर्मों से दूर रहना चाहिए।
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