Double bedroom housing : तेलंगाना में डबल बेडरूम आवासों के आवंटन में हुई गड़बड़ियों को उजागर करने के लिए राज्य सरकार ने एक अनोखा सर्वे शुरू किया है। यह जांच इस बात का पता लगाने के लिए की जा रही है कि आवंटित मकानों में वास्तविक लाभार्थी रह रहे हैं या नहीं। इसके लिए अधिकारियों ने पिछले चार महीनों के बिजली बिलों का विश्लेषण किया है। जिन घरों में 50 यूनिट से कम बिजली खपत पाई गई, वहां किसी के निवास न करने की पुष्टि हुई है।
ग्रेटर हैदराबाद क्षेत्र में किए गए इस सर्वे में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पायलट प्रोजेक्ट के तहत रामपल्ली इलाके के 2,200 डबल बेडरूम मकानों की जांच की गई, जहां अधिकतर घरों में न्यूनतम बिजली खपत भी नहीं पाई गई। आम तौर पर एक परिवार के रहने पर प्रति माह 150 से 200 यूनिट बिजली की खपत होती है, लेकिन इससे काफी कम खपत यह दर्शाती है कि मकान खाली हैं।
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इसके अलावा, नियमों के अनुसार जिन लाभार्थियों के पास (Double bedroom housing ) कार या ट्रैक्टर जैसे चारपहिया वाहन हैं, वे किसी भी आवास योजना के लिए पात्र नहीं होते। बावजूद इसके, महेश्वरम विधानसभा क्षेत्र में 165 ऐसे लाभार्थी पाए गए जिनके पास निजी वाहन मौजूद हैं। राज्यभर में अभी भी हजारों डबल बेडरूम मकानों का आवंटन बाकी है। सरकार ने फैसला किया है कि अपात्र लोगों से मकान वापस लेकर, ‘प्रजा पालना’ आवेदन प्रक्रिया के तहत वास्तविक जरूरतमंद गरीबों को ये घर दिए जाएंगे। जल्द ही जिलों में भी इसी तरह का सर्वे शुरू किया जाएगा।
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