61 हजार किसानों को ‘फार्मर किट’ वितरण शुरू
हैदराबाद। मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने राज्य में प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को प्रोत्साहित करने के लिए एक अहम पहल की शुरुआत की है। ‘रैतू नेस्तम’ कार्यक्रम के 86वें एपिसोड के दौरान सचिवालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 61,125 किसानों को ‘फार्मर किट’ वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर मंत्री ने रंगारेड्डी जिले के चयनित किसानों को प्रतीकात्मक रूप से किट प्रदान कर राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत की। यह पहल राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती से हटाकर प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करना है। मंत्री ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से न केवल मानव स्वास्थ्य (human health) प्रभावित हो रहा है, बल्कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।
समाज के लिए सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प
उन्होंने जोर देकर कहा कि प्राकृतिक खेती ही किसानों और समाज के लिए सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प है। राज्य में कुल 489 क्लस्टरों की पहचान कर प्रत्येक से 125 किसानों का चयन किया गया है। इस प्रकार 61,125 किसानों को इस योजना के तहत जोड़ा गया है। किसानों को दी जा रही ‘फार्मर किट’ में प्राकृतिक खेती पर आधारित “क्षेत्र दर्शिनी” पुस्तक, कपड़े का बैग, पहचान पत्र, विशेष कैलेंडर, टोपी, पेन और डायरी शामिल हैं।मंत्री ने किसानों से 20 से 22 मार्च तक आयोजित होने वाले रैतू महोत्सव में बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की। इस महोत्सव में 150 से अधिक स्टॉल, कृषि वैज्ञानिकों के साथ संवाद और आधुनिक तकनीकों पर जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री के हाथों किया जाएगा ‘रैतू भरोसा’ निधि का वितरण
कार्यक्रम के अंतिम दिन 22 मार्च को मुख्यमंत्री के हाथों यासंगी सीजन के तहत ‘रैतू भरोसा’ निधि का वितरण किया जाएगा। मंत्री ने किसानों से आधुनिक तकनीकों को अपनाकर लागत कम करने और आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। साथ ही, राज्य में ‘फार्मर रजिस्ट्री’ अभियान को 110 प्रतिशत लक्ष्य से अधिक पूरा करने पर कृषि अधिकारियों की सराहना की, जिसके चलते तेलंगाना को केंद्र सरकार से 422.64 करोड़ रुपये का विशेष प्रोत्साहन मिला है।
1 एकड़ से एक किसान कितना कमा सकता है?
कमाई पूरी तरह फसल, मौसम, बाजार भाव और खेती के तरीके पर निर्भर करती है। सामान्य अनाज फसलों जैसे गेहूं या धान में एक एकड़ से लगभग 20,000 से 60,000 रुपये तक की आय हो सकती है। वहीं सब्जियों, फल या नकदी फसलों की खेती करने पर यह कमाई 1 लाख रुपये या उससे अधिक भी हो सकती है। यदि आधुनिक तकनीक, सिंचाई और अच्छी योजना अपनाई जाए तो मुनाफा और बढ़ सकता है।
प्राकृतिक खेती क्या है?
यह एक ऐसी खेती पद्धति है जिसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता। इसमें गोबर, गोमूत्र, जैविक खाद और प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से फसल उगाई जाती है। इसका उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, पर्यावरण की रक्षा करना और स्वस्थ खाद्य उत्पादन करना होता है। इस पद्धति में लागत कम होती है और दीर्घकाल में जमीन की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है, जिससे किसानों को स्थायी लाभ मिल सकता है।
पैसा कमाने के लिए कौन सी फसल अच्छी है?
अधिक लाभ के लिए नकदी फसलें और उच्च मूल्य वाली फसलें बेहतर मानी जाती हैं। सब्जियां जैसे टमाटर, मिर्च, गोभी, साथ ही फल जैसे स्ट्रॉबेरी, पपीता और केला अच्छी कमाई दे सकते हैं। इसके अलावा मसाले जैसे हल्दी, अदरक और धनिया भी लाभकारी होते हैं। स्थानीय बाजार की मांग और जलवायु के अनुसार फसल का चयन करना जरूरी होता है, क्योंकि सही योजना और बाजार समझ से ही अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।
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