कोंडापुर में क्रिटिकल केयर ब्लॉक की आधारशिला
हैदराबाद। तेलंगाना के स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा (Damodar Rajanarasimha) ने कहा कि राज्य सरकार राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों के किनारे 109 अत्याधुनिक ट्रॉमा देखभाल केंद्र स्थापित कर रही है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को समय पर उपचार मिल सके। गुरुवार को मंत्री ने विधायक आरिकापुड़ी गांधी के साथ कोंडापुर में 100 शैय्याओं वाले क्रिटिकल केयर ब्लॉक के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया। इस परियोजना पर लगभग 41 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि सरकार ने व्यापक ट्रॉमा देखभाल नीति लागू की है, जिसका उद्देश्य दुर्घटना या आपात स्थिति में घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि आपातकालीन (Emergency) प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत किया जा रहा है, ताकि 10 मिनट के भीतर सहायता उपलब्ध हो सके।
31 क्रिटिकल केयर ब्लॉक स्थापित किए जा रहे
इसके तहत 108 एंबुलेंस की संख्या बढ़ाई जा रही है तथा राज्यभर में 31 क्रिटिकल केयर ब्लॉक स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि निजामाबाद, नलगोंडा, करीमनगर, महबूबाबाद, जगत्याल, संगारेड्डी, नारायणपेट और आदिलाबाद में क्रिटिकल केयर ब्लॉक पहले ही शुरू किए जा चुके हैं, जबकि 21 अन्य निर्माणाधीन हैं और उन्हें वर्ष के अंत तक चालू करने का लक्ष्य है। मंत्री ने कहा कि आईटी कॉरिडोर क्षेत्र में निष्क्रिय जीवनशैली के कारण स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। कोंडापुर क्षेत्रीय अस्पताल में वर्तमान में बेहतर चिकित्सा सेवाएं दी जा रही हैं और भविष्य में अत्याधुनिक सुविधाएं जोड़ी जाएंगी, जिससे स्थानीय निवासियों को बड़ा लाभ मिलेगा।
ट्रामा सेंटर माने क्या होता है?
अर्थ ऐसा विशेष अस्पताल या अस्पताल का विभाग होता है, जहाँ गंभीर चोट, एक्सीडेंट, जलने, सिर की चोट या आपात स्थिति वाले मरीजों का तुरंत इलाज किया जाता है। यहाँ 24 घंटे डॉक्टर, सर्जन और आधुनिक उपकरण उपलब्ध रहते हैं। ट्रॉमा सेंटर का मुख्य उद्देश्य घायल व्यक्ति को जल्दी से जल्दी इलाज देकर उसकी जान बचाना होता है, इसलिए यह आपात चिकित्सा सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
ट्रॉमा सेंटर प्राइवेट है या सरकारी?
दोनों प्रकार के होते हैं—सरकारी और प्राइवेट। सरकारी ट्रॉमा सेंटर आमतौर पर बड़े सरकारी अस्पतालों में होते हैं और कम खर्च या मुफ्त इलाज देते हैं। वहीं प्राइवेट ट्रॉमा सेंटर निजी अस्पतालों में होते हैं, जहाँ सुविधाएँ अधिक हो सकती हैं लेकिन खर्च भी ज्यादा होता है। मरीज अपनी जरूरत और आर्थिक स्थिति के अनुसार किसी भी ट्रॉमा सेंटर में इलाज करा सकता है।
भारत में कितने ट्रॉमा सेंटर हैं?
सटीक संख्या तय नहीं है, क्योंकि समय-समय पर नए ट्रॉमा सेंटर बनते रहते हैं। भारत में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा कई ट्रॉमा सेंटर स्थापित किए गए हैं, खासकर राष्ट्रीय राजमार्गों और बड़े शहरों में। इसके अलावा निजी अस्पतालों में भी ट्रॉमा सुविधाएँ उपलब्ध हैं। कुल मिलाकर देश में सैकड़ों ट्रॉमा सेंटर कार्यरत हैं, जो आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाते हैं।
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