हैदराबाद। देश की राजधानी दिल्ली स्थित ऐतिहासिक लाल किले के परिसर में तेलंगाना के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पेरीनी शिवतांडव (Perini Shivtandav) नृत्य ने दिल्लीवासियों को विशेष रूप से आकर्षित किया। शुक्रवार दोपहर लाल किले के सामने स्थित लॉन, ज्ञानपथ पर तेलंगाना के कलाकारों ने ”भारत पर्व–2026 (India Festival – 2026)” के अंतर्गत पेरीनी नृत्य का भव्य प्रदर्शन किया। युद्ध के लिए प्रस्थान से पूर्व भगवान शिव की आराधना स्वरूप उत्साह के साथ किए जाने वाले इस नृत्य को ‘योद्धाओं का नृत्य’ भी कहा जाता है।
800 वर्ष पुरानी पारंपरिक नृत्य शैली
लगभग 800 वर्ष पुरानी इस पारंपरिक नृत्य शैली की उत्पत्ति और विकास काकतीय राजवंश के काल में तेलंगाना में हुआ। गणतंत्र दिवस समारोहों के अंतर्गत हर वर्ष ज्ञानपथ पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर तेलंगाना सांस्कृतिक विभाग के नेतृत्व में कलाकारों द्वारा यह प्रस्तुति दी गई। तेलंगाना भवन के रेज़िडेंट कमिश्नर डॉ. शशांक गोयल ने स्वयं इस नृत्य प्रदर्शन को देखा और कार्यक्रम के उपरांत कलाकारों को बधाई दी।
पेरिनी किस राज्य का नृत्य है?
पेरिनी नृत्य तेलंगाना का पारंपरिक नृत्य है। यह मुख्य रूप से युद्ध के उत्साह और वीरता को दर्शाने के लिए किया जाता है। इसमें ताकतवर कदम, ढोल की ध्वनि और रणभूमि जैसी मुद्राओं के माध्यम से कहानी प्रस्तुत की जाती है।
टिप्पनी नृत्य कहाँ का है?
टिप्पनी नृत्य तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में प्रसिद्ध है। इसे मुख्य रूप से खेती और कृषि उत्सवों के दौरान किया जाता है। इसमें महिलाएं पारंपरिक गहनों और रंगीन पोशाकों के साथ ताल और गीतों में नृत्य करती हैं।
पेरिनी नाट्यम का अर्थ क्या है?
पेरिनी नाट्यम का अर्थ है “युद्ध नृत्य”। यह नृत्य वीरता, साहस और युद्ध कौशल को दर्शाने के लिए किया जाता है। इसमें पैर के जोरदार कदम, ढोल की ताल और युद्ध मुद्रा के प्रदर्शन के माध्यम से कहानी का भाव दिखाया जाता है।
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