हैदराबाद। तेलंगाना मानवाधिकार आयोग (TGHR) ने करला राजेश की कथित अवैध हिरासत, हिरासत में यातना और मौत के आरोपों पर गंभीर संज्ञान लिया है। मृतक की मां करला ललिता और सामाजिक कार्यकर्ता मंडा कृष्णा मडिगा (Manda Krishna Madiga) द्वारा दायर शिकायतों के आधार पर आयोग ने मामला दर्ज किया। आरोप है कि चिलकुर और कोडाद ग्रामीण पुलिस ने राजेश को अवैध रूप से हिरासत में लेकर थर्ड डिग्री यातनाएं दीं, झूठे मामलों में फंसाया और परिजनों से मिलने की अनुमति नहीं दी।
प्रधान सचिव को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश
बाद में उप-जेल से सरकारी अस्पतालों में स्थानांतरित किए जाने के दौरान गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने इसे इसी विषय से जुड़ी पूर्व शिकायत के साथ जोड़ते हुए गृह विभाग के प्रधान सचिव को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
हिरासत में मौत क्या होती है?
उस स्थिति को कहा जाता है जब कोई व्यक्ति पुलिस, जेल या किसी अन्य सरकारी हिरासत में रहते हुए मर जाता है। यह प्राकृतिक कारणों, बीमारी, शारीरिक उत्पीड़न या अत्यधिक बल प्रयोग से हो सकती है।
हिरासत में मौत का मतलब क्या है?
इसका अर्थ है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु उसके हिरासत में होने के दौरान हुई। इसमें मृतक के अधिकारों का उल्लंघन, उचित चिकित्सा सुविधा की कमी या हिंसात्मक परिस्थितियों के कारण मौत शामिल हो सकती है।
सबसे जल्दी मौत कब होती है?
मौत अक्सर हिरासत में प्रवेश के शुरुआती दिनों में होती है। यह कमजोर स्वास्थ्य, शारीरिक उत्पीड़न, मानसिक तनाव या चिकित्सा की अनुपलब्धता के कारण जल्दी हो सकती है।
पुलिस हिरासत में कितने मरे हैं?
मृतकों की संख्या सालाना आधार पर अलग-अलग राज्यों और वर्षों में बदलती रहती है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और संबंधित पुलिस विभागों के आंकड़ों के अनुसार, हर साल दर्जनों से सैकड़ों मामले दर्ज होते हैं, जिसमें न्यायिक समीक्षा और जांच के बाद सजा या राहत दी जाती है।
Read Telugu News: https://vaartha.com/
यह भी पढ़ें :