Telangana : शहीद कांस्टेबल के परिवार को 1 करोड़ रुपए अनुग्रह राशि, सरकारी नौकरी

By Ajay Kumar Shukla | Updated: February 2, 2026 • 2:11 PM

हैदराबाद। तेलंगाना सरकार (Telangana Government) ने गांजा तस्करों के हमले में गंभीर रूप से घायल होकर शहीद हुई आबकारी कांस्टेबल गजुला सौम्या (25) के परिवार के लिए 1 करोड़ रुपए की अनुग्रह राशि और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। आबकारी मंत्री जूपल्ली कृष्णा राव (Jupally Krishna Rao) ने यह घोषणा करते हुए सौम्या की शहादत पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के दौरान अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जान गंवाने वाली सौम्या के परिवार को सरकार की ओर से हर तरह का सहयोग दिया जाएगा।

आबकारी कर्मियों की सुरक्षा के लिए उन्हें हथियारों से किया जाएगा लैस

मंत्री ने यह भी बताया कि भविष्य में ड्यूटी पर तैनात आबकारी कर्मियों की सुरक्षा के लिए उन्हें हथियारों से लैस किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि 23 जनवरी को निजामाबाद में कांस्टेबल सौम्या ने गांजा की अवैध तस्करी में लिप्त गिरोह को पकड़ने का साहसिक प्रयास किया था। इसी दौरान तस्करों ने अपने वाहन से उन्हें टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें उपचार के लिए हैदराबाद के निज़ाम्स इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (निम्स) में भर्ती कराया गया था, जहां शनिवार रात इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। सरकार ने सौम्या के साहस और कर्तव्यनिष्ठा को नमन करते हुए उनके बलिदान को कभी न भूलने का भरोसा दिलाया है।

सौम्या की मौत पर मुख्यमंत्री सख्त, तस्करों पर कड़ी कार्रवाई के आदेश

हैदराबाद। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने आबकारी कांस्टेबल गजुला सौम्या के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। रविवार को जारी एक बयान में मुख्यमंत्री ने ड्यूटी के दौरान सौम्या की जान जाने पर गहरा दुख प्रकट किया। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को सौम्या की मौत के लिए ज़िम्मेदार तस्करों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया।

शहीद कौन-कौन हुए थे?

वे लोग होते हैं जिन्होंने देश की सेवा करते हुए अपने प्राण न्योछावर किए। भारत में विभिन्न कालों में कई शहीद हुए हैं, जैसे सुभाष चंद्र बोस के सेनानी, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़े और शहीद हुए। इसके अलावा भारत-पाक युद्धों, कश्मीर संघर्ष और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भी कई सैनिक शहीद हुए हैं। शहीदों की बलिदान गाथा देशभक्ति और साहस का प्रतीक मानी जाती है।

शहीद दिवस कब है?

भारत में शहीद दिवस अलग-अलग तारीखों को मनाया जाता है। मुख्य रूप से 23 मार्च को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की याद में शहीद दिवस मनाया जाता है। इसके अलावा 30 जनवरी को महात्मा गांधी की हत्या के दिन और अन्य सैनिकों की याद में भी शहीद दिवस आयोजित किया जाता है। यह दिन शहीदों के बलिदान को सम्मान देने और देशभक्ति की भावना जागृत करने के लिए मनाया जाता है।

शहीद किसे कहते हैं?

वह व्यक्ति होता है जिसने देश, धर्म या न्याय के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यह शब्द खासकर उन लोगों के लिए इस्तेमाल होता है जिन्होंने अपने जीवन की सबसे बड़ी कीमत चुकाकर दूसरों की सुरक्षा, स्वतंत्रता या धर्म की रक्षा की। शहीद का बलिदान समाज और देश के लिए प्रेरणा का स्रोत माना जाता है और उन्हें सम्मानित किया जाता है।

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