भव्य रूप से मनाई जाएगी अंबेडकर जयंती
हैदराबाद। भारत रत्न डॉ. बी.आर. अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर तेलंगाना सरकार (Telangana Govt.) इस बार कार्यक्रम को अभूतपूर्व और भव्य तरीके से आयोजित करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के निर्देश पर सभी विभाग मिलकर इस आयोजन को सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक भावना का प्रतीक बनाने में जुटे हैं। रविवार को कल्याण विभाग के मंत्री अड्लुरी लक्ष्मण कुमार (Lakshaman Kumar) ने टैंक बंड स्थित अंबेडकर प्रतिमा स्थल का अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया और तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि सरकार “इंदिरम्मा राज” के तहत सामाजिक न्याय, समानता और कल्याण के सिद्धांतों पर काम कर रही है और अंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ा रही है।
सभी जिलों से बड़ी संख्या में लोग होंगे शामिल
मंत्री ने बताया कि 14 अप्रैल को होने वाले इस कार्यक्रम में राज्य के सभी जिलों से बड़ी संख्या में लोग, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, कर्मचारी और युवा शामिल होंगे। इसे देखते हुए व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल पर साफ-सफाई, अस्थायी शौचालय, चिकित्सा शिविर, एंबुलेंस, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंध, पार्किंग और महिलाओं, बुजुर्गों व दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
पूरे क्षेत्र में निगरानी के लिए कैमरे भी लगाए जाएंगे। मंत्री ने बताया कि अंबेडकर के जीवन और विचारों को लोगों तक पहुंचाने के लिए विशेष प्रचार कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जागरूकता गतिविधियों का आयोजन भी किया जाएगा। राज्य के सभी जिलों में भी जयंती समारोह भव्य रूप से आयोजित किए जाएंगे। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी व्यवस्थाएं समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरी की जाएं, ताकि कार्यक्रम सफल हो सके। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बड़ी संख्या में पहुंचकर अंबेडकर को श्रद्धांजलि दें और सामाजिक न्याय के इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाएं।
अंबेडकर के तीन नारे कौन से हैं?
प्रसिद्ध सामाजिक सुधारक डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए तीन प्रमुख नारे “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” हैं। ये नारे समाज में जागरूकता, एकता और अधिकारों के लिए लड़ने की प्रेरणा देते हैं। इनका उद्देश्य विशेष रूप से दलित और वंचित वर्गों को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाना, आपसी सहयोग बढ़ाना और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित करना था।
बाबा साहब का इतिहास क्या है?
भारत के महान समाज सुधारक डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त की और कोलंबिया विश्वविद्यालय व लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च अध्ययन किया। वे भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार थे और उन्होंने दलितों के अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया। 1956 में उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया और सामाजिक समानता का संदेश दिया।
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर किसकी पूजा करते थे?
महान विचारक डॉ. भीमराव अंबेडकर किसी पारंपरिक देवी-देवताओं की पूजा नहीं करते थे, बल्कि तर्क, समानता और मानवता के सिद्धांतों को महत्व देते थे। जीवन के अंतिम चरण में उन्होंने बौद्ध धर्म को अपनाया और गौतम बुद्ध के विचारों को अपना मार्गदर्शक माना। वे बुद्ध के ज्ञान, करुणा और समता के सिद्धांतों को ही वास्तविक पूजा मानते थे।
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