Infertility : मातृत्व के सपनों को साकार करने में सरकारी केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका – राजनरसिम्हा

By Ajay Kumar Shukla | Updated: February 27, 2026 • 8:12 AM

स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों एवं कर्मचारियों की सराहना

हैदराबाद। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा ने कहा कि बांझपन (Infertility) की समस्या से जूझ रहे दंपतियों के मातृत्व के सपनों को साकार करने में सरकारी आईवीएफ केंद्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने गांधी अस्पताल और पेटलाबुर्जु अस्पताल के आईवीएफ (IVF) केंद्रों में कार्यरत डॉक्टरों एवं कर्मचारियों को बधाई दी। मंत्री ने बताया कि गांधी आईवीएफ सेंटर में अक्टूबर 2024 तथा पेटलाबुर्जु आईवीएफ सेंटर में दिसंबर 2024 से प्रजनन संबंधी चिकित्सा सेवाएं शुरू की गईं। अब तक दोनों केंद्रों के माध्यम से लगभग 27,300 लोगों को फर्टिलिटी सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े राज्य में बढ़ती इन्फर्टिलिटी समस्या को दर्शाते हैं और इससे अधिक जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

आर्थिक बोझ उठाने की स्थिति नहीं होनी चाहिए

उन्होंने कहा कि मातृत्व का सपना पूरा करने के लिए लोगों को निजी आईवीएफ केंद्रों में जाकर आर्थिक बोझ उठाने की स्थिति नहीं होनी चाहिए। इसी दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है। जल्द ही वारंगल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का उद्घाटन किया जाएगा, जहां एक आईवीएफ सेंटर स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा अदिलाबाद रिम्स, कोंडापुर एरिया अस्पताल और निजामाबाद गवर्नमेंट जनरल अस्पताल में भी आईवीएफ केंद्र खोलने का निर्णय लिया गया है। मंत्री ने कहा कि सरकार भवन, आधारभूत सुविधाएं और स्टाफ की नियुक्ति कर सकती है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करना डॉक्टरों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मांगी गई पदोन्नतियां दी जा रही हैं, आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं तथा टीवीवीपी को डायरेक्टरेट में परिवर्तित किया जा रहा है।

लापरवाही बरतने को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्यूटी से अनुपस्थित रहने या लापरवाही बरतने को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुछ अस्पतालों में कम उपस्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने डीएमएचओ, डीसीएच और सुपरिंटेंडेंट्स को गंभीरता से कार्य करने, क्षेत्रीय दौरे करने और आकस्मिक निरीक्षण कर लापरवाहों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उन्हें सरकारी डॉक्टरों और कर्मचारियों पर पूरा विश्वास है। ‘जनता हम पर भरोसा करती है, हमें सामूहिक प्रयासों से उस विश्वास को बनाए रखना है।, कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव क्रिस्टिना जेड चोंग्तु, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आयुक्त संगीत सत्यनारायण, आरोग्यश्री सीईओ उदय कुमार, डीएमई नरेंद्र कुमार, टीवीवीपी आयुक्त अजय कुमार और लोक स्वास्थ्य निदेशक रवींद्र नायक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

सरकारी आईवीएफ सुविधा से जन्मा यह राज्य का पहला शिशु – मंत्री

राज्य में सरकारी आईवीएफ सेवाओं के माध्यम से जन्म लेने वाले पहले शिशु के रूप में एक नवजात बालिका ने नया इतिहास रच दिया है। गांधी अस्पताल के आईवीएफ सेंटर में उपचार प्राप्त करने वाली पहली महिला ने हाल ही में एक स्वस्थ बालिका को जन्म दिया। सरकारी क्षेत्र में आईवीएफ सुविधा के जरिए जन्मा यह राज्य का पहला शिशु माना जा रहा है। इस उपलब्धि को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया जा रहा है।

इस अवसर पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर , हैदराबाद में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिंह ने गांधी अस्पताल आईवीएफ सेंटर के डॉक्टरों और कर्मचारियों को बधाई दी। मंत्री ने आईवीएफ सेंटर की प्रमुख डॉ. शोभा, प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. सुमित्रा नायर, आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. फातिमा रानी, एम्ब्रायोलॉजिस्ट शिवकृष्ण तथा नर्सिंग ऑफिसर पद्मावती सहित अन्य स्टाफ को सम्मानित करते हुए प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में इस तरह की उन्नत प्रजनन सेवाओं की सफलता से आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और निजी संस्थानों पर निर्भरता कम होगी।

बांझपन का मुख्य कारण क्या है?

गर्भधारण में असफलता के पीछे कई कारण हो सकते हैं। महिलाओं में हार्मोन असंतुलन, पीसीओएस, थायरॉइड समस्या, फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज या उम्र बढ़ना प्रमुख वजहें होती हैं। पुरुषों में कम शुक्राणु संख्या, कमजोर गतिशीलता या हार्मोन संबंधी समस्या कारण बन सकती है। इसके अलावा अत्यधिक तनाव, मोटापा, धूम्रपान, शराब और खराब जीवनशैली भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित करते हैं।

पुरुष बांझपन के लक्षण क्या होते हैं?

अक्सर स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन गर्भधारण में लगातार असफलता एक संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में यौन इच्छा में कमी, इरेक्शन की समस्या, अंडकोष में सूजन या दर्द, तथा चेहरे या शरीर के बालों में कमी जैसे हार्मोन संबंधी संकेत दिख सकते हैं। सही कारण जानने के लिए वीर्य परीक्षण और डॉक्टर से परामर्श आवश्यक होता है।

बांझपन कैसे खत्म करें?

उपचार कारण पर निर्भर करता है। जीवनशैली में सुधार, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और नशे से दूरी लाभकारी हो सकती है। हार्मोन असंतुलन या संक्रमण होने पर दवाएं दी जाती हैं। गंभीर मामलों में आईयूआई या आईवीएफ जैसी सहायक प्रजनन तकनीकों का सहारा लिया जाता है। समय पर स्त्री-रोग विशेषज्ञ या एंड्रोलॉजिस्ट से परामर्श लेना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

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