हैदराबाद। पर्यटन, संस्कृति और आबकारी मंत्री जुपल्ली कृष्णा राव (Jupally Krishna Rao) ने फोन टैपिंग मामले में पिछली बीआरएस सरकार द्वारा अपनाई गई अलोकतांत्रिक नीतियों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि फोन टैपिंग की घटना बेहद घृणित है और इस मामले की एसआईटी (Special Investigation Team) जांच से यह साफ हो जाएगा कि इसके मास्टरमाइंड और अपराधी कौन हैं। सच्चाई निश्चित रूप से सामने आएगी। शनिवार को यहां प्रजा भवन में मीडिया से बात करते हुए जूपल्ली कृष्णा राव ने उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क के साथ कहा कि कोई भी राजनीतिक नेता कानून से ऊपर नहीं है और जिन्होंने भी गलत काम किए हैं, उन्हें पार्टी से परे जाकर सजा भुगतनी होगी।
25 वर्षों के राजनीतिक जीवन में मैंने कई सरकारें देखी
उन्होंने कहा कि अपने 25 वर्षों के राजनीतिक जीवन में मैंने कई सरकारें देखी हैं, लेकिन फोन टैपिंग जैसी घिनौनी राजनीतिक साजिशें केवल पिछली बीआरएस सरकार के दौरान ही देखी गईं। मंत्री ने याद दिलाया कि तेलंगाना में 2021 से फोन टैपिंग के आरोप सामने आ रहे हैं और पूर्व राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अकुनुरी मुरली, ईटाला राजेंद्र और आर.एस. प्रवीन कुमार जैसे लोगों ने पहले ही संदेह जताया था कि उनकी जासूसी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा हैं। जूपल्ली कृष्णा राव ने पिछली बीआरएस सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पुलिस और खुफिया एजेंसियों जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल अपने ही पार्टी नेताओं, विपक्षी नेताओं और व्यापारियों को ब्लैकमेल करने के लिए करना सरकार के नैतिक पतन को दर्शाता है।
वह इतने चिंतित क्यों हो गए?
मंत्री ने सवाल उठाया कि जब केटी रामा राव को एसआईटी ने एक गवाह के रूप में पूछताछ के लिए बुलाया, तो वह इतने चिंतित क्यों हो गए। उन्होंने केटीआर का मजाक उड़ाते हुए कहा कि जो नेता पहले किसी भी जांच का सामना करने के दावे करते थे, वे अब नोटिस मिलने पर नाटकीय व्यवहार कर रहे हैं। जूपल्ली कृष्णा राव ने पूछा कि अगर उनका इस फोन टैपिंग मामले से कोई संबंध नहीं है और वे निर्दोष हैं, तो डरने की क्या जरूरत है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के सत्ता में आने के बाद सरकार ने बदले की राजनीति नहीं की। अगर हमारी मंशा ऐसी होती तो हम बहुत पहले ही बीआरएस नेताओं को जेल भेज चुके होते। लेकिन हम कानून का सम्मान करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि केटीआर सिर्फ इसलिए क्यों डर गए क्योंकि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 160 के तहत नोटिस जारी किया गया, जो केवल एक गवाह के रूप में जानकारी मांगने के लिए होता है।
फोन टेपिंग क्यों की जाती है?
राष्ट्रीय सुरक्षा, गंभीर अपराधों की जांच और आतंकवाद या संगठित अपराध पर नजर रखने के उद्देश्य से यह प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसका मकसद सबूत जुटाना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना होता है, लेकिन यह केवल कानूनी अनुमति के तहत ही की जा सकती है।
मोबाइल फोन कैसे टैप किया जाता है?
तकनीकी माध्यमों से नेटवर्क स्तर पर निगरानी रखी जाती है। इसमें सेवा प्रदाताओं की मदद से कॉल, संदेश या डेटा गतिविधि को रिकॉर्ड किया जाता है। यह काम आम नागरिक नहीं कर सकते, बल्कि केवल अधिकृत एजेंसियां ही करती हैं।
क्या पुलिस हमारे फोन को टैप कर सकती है?
सीधे तौर पर नहीं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर संभव है। सक्षम प्राधिकारी की अनुमति मिलने के बाद ही पुलिस या जांच एजेंसियां किसी व्यक्ति के फोन की निगरानी कर सकती हैं, वह भी सीमित अवधि और तय उद्देश्य के लिए।
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