तिरुपति। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) की ओर से शनिवार शाम श्री टाटैयागुंटा गंगम्मा मंदिर में पारंपरिक श्रीवारी साड़ी श्रद्धापूर्वक भेंट की गई। इस अवसर पर मेळम, मंगल वाद्ययंत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच भव्य शोभायात्रा निकाली गई। टीटीडी तिरुमला पोटु के एईओ गुंडलूरु मुनिरत्नम ने श्री गोविंदराजा स्वामी मंदिर से शोभायात्रा के साथ साड़ी लेकर प्रस्थान किया और इसे मंदिर अध्यक्ष महेश यादव को सौंपा। 5 मई से शुरू हुई वार्षिक गंगम्मा जातरा (Gangamma Jatra) 13 मई तक चलेगी। परंपरा के अनुसार श्री गंगम्मा को श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर की बहन माना जाता है और जातरा के दौरान हर वर्ष श्रीवारी साड़ी अर्पित की जाती है। कार्यक्रम में तिरुपति विधायक आरानी श्रीनिवासुलु, टीटीडी बोर्ड सदस्य ज्योतुला नेहरू, पनाबाका लक्ष्मी, जानकीदेवी, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आजकल कौन सी साड़ी सबसे ज्यादा चल रही है?
फैशन ट्रेंड के अनुसार हल्की और डिजाइनर साड़ियां ज्यादा पसंद की जा रही हैं। Banarasi Saree, Organza Saree और सीक्विन व प्रिंटेड साड़ियां आजकल काफी चलन में हैं। शादी और त्योहारों में सिल्क साड़ियों की मांग अधिक रहती है, जबकि रोजमर्रा में हल्की कॉटन और जॉर्जेट साड़ियां लोकप्रिय हैं।
सबसे महंगी साड़ी कौन सी है?
दुनिया की सबसे महंगी साड़ियों में Vivah Pattu Saree का नाम लिया जाता है। इसमें सोने के धागों, कीमती पत्थरों और विशेष कढ़ाई का उपयोग किया गया था। इसकी कीमत करोड़ों रुपये तक बताई गई थी, जिससे यह बेहद खास और लग्जरी साड़ी मानी जाती है।
साड़ियों की रानी कौन थी?
भारतीय वस्त्र परंपरा में Banarasi Saree को अक्सर “साड़ियों की रानी” कहा जाता है। इसकी महीन बुनाई, जरी का काम और शाही डिजाइन इसे विशेष बनाते हैं। शादी और पारंपरिक अवसरों पर इसकी काफी मांग रहती है।
नौवारी साड़ी कौन सी होती है?
महाराष्ट्र की पारंपरिक साड़ी शैली को नौवारी साड़ी कहा जाता है। इसकी लंबाई लगभग नौ गज होती है और इसे विशेष तरीके से पहना जाता है, जिससे चलने-फिरने में सुविधा रहती है। यह शैली पारंपरिक मराठी संस्कृति और त्योहारों में विशेष रूप से लोकप्रिय मानी जाती है।
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