हैदराबाद । माइनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन ई. अनिल ने कहा कि कांग्रेस ने कामारेड्डी घोषणा के तहत बीसी वर्ग (BC ) को 42 प्रतिशत आरक्षण देने का वादा किया था और नगरपालिका चुनावों में उस वादे को पूरा किया। उन्होंने बताया कि 42 प्रतिशत आरक्षण के लिए विधानसभा में विधेयक पारित कर राज्यपाल को भेजा गया, लेकिन केंद्र सरकार (Central Government) ने इसे रोक दिया।
डीसीसी अध्यक्ष पदों में भी बीसी वर्ग को प्राथमिकता
उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्रीय मंत्री बंड़ी संजय कुमार और जी. किशन रेड्डी ने बीसी आरक्षण में बाधा डाली। एक ओर वे आरक्षण की मांग करते हैं, वहीं दूसरी ओर अदालत में इसके खिलाफ मामले दायर किए गए। उनके अनुसार भाजपा और बीआरएस के विरोध के बावजूद नगरपालिका चुनावों में बीसी वर्ग को 61 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया, जो चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित आरक्षण से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि डीसीसी अध्यक्ष पदों में भी बीसी वर्ग को प्राथमिकता दी गई। पंचायत चुनावों में 42 प्रतिशत से अधिक टिकट बीसी उम्मीदवारों को दिए गए और उनमें से अधिकांश विजयी रहे। वारंगल,पेद्दापेल्ली , महबूबनगर और निजामाबाद लोकसभा क्षेत्रों में एससी, एसटी और बीसी वर्ग को 90 प्रतिशत से अधिक सीटें दी गईं।
आरक्षण के मुद्दे बंडी संजय को राजनीति बंद करनी चाहिए
उन्होंने कहा कि बीआरएस सरकार के कार्यकाल में 13 नगर निगमों में से केवल 4 मेयर पद बीसी वर्ग को दिए गए थे, जबकि वर्तमान में 7 नगर निगमों में से 4 मेयर पद बीसी वर्ग को दिए गए हैं। बीसी आरक्षण के खिलाफ याचिका दायर करने वालों को बीआरएस द्वारा बी-फॉर्म दिए जाने का भी उन्होंने आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि मुस्लिमों भाजपा में शामिल करने पर आपत्ति जताती है, तो करीमनगर नगर निगम में बीसी के लिए आरक्षित वार्ड से मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट कैसे दिया गया। बीसी आरक्षण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि बंडी संजय को राजनीति बंद करनी चाहिए।
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